बिजनेस रेमेडीज़/जयपुर। ‘वर्तमान भारतीय आयकर अधिनियम, 1961 को लागू हुए 6 दशक से अधिक हो चुके हैं, तथा इसे भारतीय संसद द्वारा पुन: संशोधित करके लागू किया जाना है। नए आयकर विधेयक, 2025 का उद्देश्य वर्तमान आयकर अधिनियम को सरल बनाना तथा इसकी पठनीयता में सुधार करना है। इस विधेयक का उद्देश्य कोई महत्वपूर्ण कर परिवर्तन लाना नहीं है, न ही यह प्रचलित कर दरों में कोई परिवर्तन करता है। वर्तमान आयकर अधिनियम तथा प्रस्तावित आयकर विधेयक में कुछ अंतर हैं। इनमें से कुछ विसंगतियां मुद्रण संबंधी त्रुटियां प्रतीत होती हैं, हालांकि स्पष्टता का इंतजार है। इसलिए, सदस्यों के लिए ऐसे महत्वपूर्ण अंतरों को समझना तथा जहां भी आवश्यक हो तथा संभव हो, सुधारात्मक कार्रवाई/कदम उठाना महत्वपूर्ण होगा।” राघव कुमार बजाज, वकील, प्रत्यक्ष कर, खेतान एंड कंपनी, मुंबई ने आज जयपुर में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित सेशन ‘ऑन लॉज इम्पेक्टींग बिजनेस’ के दौरान कहा।
खेतान एंड कंपनी, मुंबई के पार्टनर और रोजगार एवं श्रम कानून के विशेषज्ञ दीपक कुमार के अनुसार, नए श्रम संहिताओं को खंडित भारतीय श्रम कानून अनुपालन ढांचे में सुधार और आधुनिकीकरण के उद्देश्य से पेश किया गया था। हालांकि, राज्यों से सीमित समर्थन और हितों तथा उद्योग और श्रमिक प्रतिनिधियों के विभिन्न गुटों द्वारा कुछ प्रावधानों के लगातार विरोध के कारण श्रम संहिताओं का कार्यान्वयन एक दूर का सपना बना हुआ है। फिर भी उद्योग और नियोक्ता प्रस्तावित नई व्यवस्था के साथ अपनी प्रक्रियाओं और प्रथाओं को संरेखित करने के लिए लगातार व्यवहार्यता आकलन कर रहे हैं।
सीआईआई-राजस्थान के सीनियर डायरेक्टर और स्टेट हैडनितिन गुप्ता ने बताया कि, पॉलिसी एडवोकेसी और सदस्यों को सीखने और प्रतिस्पर्धात्मकता प्रदान करने के लिए सीआईआई-राजस्थान ने इस सत्र का आयोजन किया।

