तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का अर्थ यह नहीं है कि यहां के युवाओं को रोजगार मिल रहा है और लोग पहले से समृद्ध हो रहे हैं। बढ़ती अर्थव्यवस्था हमेशा रोजगार पैदा नहीं करती। प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से नौकरियां कम हो रही हैं। अमीर अपना पैसा विदेशों में निवेश कर रहे हैं। वित्त मंत्री को अपने बजट में यह ध्यान रखना होगा कि आम आदमी को किस तरह ज्यादा राहत मिले। उन्हें आर्थिक सुधारों पर आगे बढऩा होगा और अहम वित्तीय निर्णय लेने होंगे। अगले महीने जुलाई में वित्त मंत्री को मोदी सरकार की तीसरी पारी का पहला बजट पेश करना है। बजट पूर्व औद्योगिक क्षेत्रों से बैठकों का दौर जारी है। हालांकि आज के दौर में आम आदमी को बजट के प्रति कोई ज्यादा जिज्ञासा नहीं रहती लेकिन आम आदमी को केवल इतना मतलब होता है कि क्या उसकी जेब में कुछ पैसा बचता है या नहीं। औद्योगिक एवं वाणिज्य क्षेत्र अपने-अपने हित ढूंढने के लिए बजट पर जरूर पैनी नजर रखते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने इस महीने सात साल पूरे कर लिए हैं। कोविड के बाद से लगभग तीन सालों में जीएसटी राजस्व आम तौर पर कम से कम 11 फीसदी बढ़ा है। वित्तीय वर्ष, 2023-24 में हुई 1.68 लाख करोड़ रुपए की औसत मासिक प्राप्तियों की तुलना में इस वित्तीय वर्ष के पहले महीने से संबंधित कर तीन फीसदी ज्यादा है। वहीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) काउंसिल की बैठक के दौरान कुछ अहम घोषणाएं की हैं, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

