Saturday, August 8, 2026 |
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मिथकों को तोड़ते हुए, विश्वास की नींव रखते हुए: आधुनिक भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य पर Dr. Pratibha Agrawal

by Business Remedies
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जयपुर | चारु भाटिया 

प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा अग्रवाल, सहसंस्थापक, आरवी हॉस्पिटल, जयपुर, महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य, इन्फर्टिलिटी उपचार और मिनिमली इनवेसिव गायनेकोलॉजिकल सर्जरी के क्षेत्र में अनुभवी चिकित्सक हैं। उन्होंने एमबीबीएस के बाद एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर से स्त्री एवं प्रसूति रोग में स्नातकोत्तर किया तथा इन्फर्टिलिटी, लैप्रोस्कोपी और एनडीवीएच जैसी उन्नत तकनीकों में विशेषज्ञता हासिल की। अपने पति डॉ. देवेंद्र गुप्ता के साथ उन्होंने आरवी हॉस्पिटल की स्थापना इस उद्देश्य से की कि मरीजों को एक ही स्थान पर नैतिक, आधुनिक और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। इस विशेष बातचीत में उन्होंने अपने सफर, महिलाओं के स्वास्थ्य, बढ़ती इन्फर्टिलिटी, आधुनिक तकनीक और जागरूकता की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।

प्रश्न: आप आरवी हॉस्पिटल की सहसंस्थापक हैं। अब तक का आपका सफर कैसा रहा और इस क्षेत्र को चुनने की प्रेरणा आपको कहां से मिली?

उत्तर: चिकित्सा क्षेत्र में आने की प्रेरणा मुझे अपने परिवार से मिली। मेरे सभी भाईबहन डॉक्टर हैं और बचपन से ही मैंने चिकित्सा को सेवा और जिम्मेदारी के रूप में देखा। मातापिता के त्याग और प्रोत्साहन ने मुझे इस दिशा में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया।

मैंने बड़ौदा से एमबीबीएस और एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर से प्रसूति एवं स्त्री रोग में पीजी किया। इसके बाद इन्फर्टिलिटी, लैप्रोस्कोपी और एनडीवीएच जैसी आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षण लिया। अनुभव के दौरान महसूस हुआ कि बेहतर इलाज के साथ मरीज का विश्वास और सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी सोच के साथ हमने आरवी हॉस्पिटल की शुरुआत की, जहां गुणवत्तापूर्ण, किफायती और मरीजकेंद्रित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

प्रश्न: आरवी हॉस्पिटल में मरीजों को कौनकौन सी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं?

उत्तर: हमारा प्रयास है कि मरीजों को एक ही छत के नीचे व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं मिलें। अस्पताल में गर्भावस्था की देखभाल, हाईरिस्क प्रेग्नेंसी, सुरक्षित प्रसव, इन्फर्टिलिटी उपचार, मासिक धर्म संबंधी समस्याओं का उपचार, लैप्रोस्कोपिक सर्जरी और महिलाओं के लिए निवारक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं।

इसके अलावा डॉ. देवेंद्र गुप्ता जनरल मेडिसिन और मेडिकल इमरजेंसी का प्रबंधन करते हैं। आवश्यकता पड़ने पर ऑर्थोपेडिक और पीडियाट्रिक विशेषज्ञ भी उपलब्ध रहते हैं। हमारा उद्देश्य मरीजों को समग्र और बहुविषयक चिकित्सा सेवाएं प्रदान करना है।

प्रश्न: अस्पताल की स्थापना के दौरान आपको किन प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

उत्तर: अस्पताल स्थापित करना केवल चिकित्सकीय नहीं बल्कि प्रशासनिक चुनौती भी होती है। डॉक्टर होने के साथ हमें अस्पताल प्रबंधन, कर्मचारियों की जिम्मेदारी, गुणवत्ता नियंत्रण और मरीजों की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। स्वास्थ्य सेवाओं में निश्चित कार्य समय नहीं होता, इसलिए निजी और पेशेवर जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना भी कठिन होता है।

आज एक और बड़ी चुनौती इंटरनेट और सोशल मीडिया पर फैल रही अधूरी स्वास्थ्य जानकारी है। कई मरीज पहले से बनी धारणाओं के साथ आते हैं। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी केवल इलाज करना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर उनकी शंकाओं का समाधान करना और सही जानकारी देना भी है।

प्रश्न: बदलती जीवनशैली ने महिलाओं के स्वास्थ्य को किस प्रकार प्रभावित किया है? आज महिलाओं में कौनसी समस्याएं सबसे अधिक देखने को मिल रही हैं?

उत्तर: आधुनिक जीवनशैली का महिलाओं के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ा है। अनियमित दिनचर्या, शारीरिक गतिविधियों में कमी, प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता सेवन और तनाव के कारण हार्मोनल असंतुलन तेजी से बढ़ रहा है। पीसीओएस, थायरॉयड विकार और अनियमित मासिक धर्म जैसी समस्याएं अब कम उम्र की लड़कियों में भी देखने को मिल रही हैं।

इसके साथ ही कई महिलाएं व्हाइट डिस्चार्ज जैसी समस्याओं पर खुलकर बात नहीं करतीं, जबकि समय पर जांच और उपचार जरूरी है। मैं हमेशा निवारक स्वास्थ्य जांच पर जोर देती हूं। सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए एचपीवी वैक्सीन और नियमित स्क्रीनिंग बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसी तरह महिलाओं को समयसमय पर ब्रेस्ट सेल्फ एग्जामिनेशन भी करना चाहिए ताकि किसी भी असामान्यता की समय रहते पहचान हो सके।

प्रश्न: आज के समय में बांझपन (इन्फर्टिलिटी) के मामलों में लगातार वृद्धि क्यों देखने को मिल रही है?

उत्तर: आज इन्फर्टिलिटी बढ़ने का सबसे बड़ा कारण देर से परिवार नियोजन है। अधिकांश युवा पहले शिक्षा और करियर पर ध्यान देते हैं, जिससे कई दंपति 35 वर्ष या उससे अधिक आयु में गर्भधारण की योजना बनाते हैं। बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में अंडों की संख्या और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं, जिससे प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है।

इसके अलावा तनाव, मोटापा, पर्याप्त नींद की कमी, असंतुलित खानपान, प्रोसेस्ड फूड, धूम्रपान, शराब और निष्क्रिय जीवनशैली भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है। पीसीओएस और एंडोमेट्रियोसिस जैसी चिकित्सकीय स्थितियां भी इसकी बड़ी वजह हैं। यह समझना जरूरी है कि इन्फर्टिलिटी केवल महिलाओं की समस्या नहीं है। पुरुषों में भी इसके कई कारण हो सकते हैं, इसलिए जांच और उपचार दोनों पार्टनर का समान रूप से होना चाहिए।

प्रश्न: स्त्री रोग एवं इन्फर्टिलिटी उपचार में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका को आप किस प्रकार देखती हैं?

उत्तर: आधुनिक तकनीकों ने महिलाओं के स्वास्थ्य और इन्फर्टिलिटी उपचार में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। उन्नत अल्ट्रासाउंड के माध्यम से कई बीमारियों की शुरुआती अवस्था में ही सटीक पहचान संभव हो रही है। वहीं एग फ्रीजिंग जैसी तकनीक महिलाओं को भविष्य के लिए मातृत्व की योजना बनाने का विकल्प देती है।

इन्फर्टिलिटी उपचार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। AI की सहायता से स्पर्म, अंडों और भ्रूण की गुणवत्ता का अधिक सटीक विश्लेषण किया जा सकता है, जिससे आईवीएफ उपचार के बेहतर परिणाम मिलते हैं। इसके अलावा पीजीडी जैसी तकनीकों से भ्रूण में आनुवंशिक विकारों की पहचान कर स्वस्थ गर्भधारण की संभावना बढ़ाई जा सकती है।

प्रश्न: गर्भावस्था से जुड़े ऐसे कौनसे आम मिथक हैं, जिनका सामना आपको अक्सर करना पड़ता है?

उत्तर: आज भी गर्भावस्था को लेकर समाज में कई ऐसे मिथक प्रचलित हैं जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। उदाहरण के लिए, कई लोग मानते हैं कि गर्भवती महिला को दूध या दही नहीं खाना चाहिए, जबकि ये कैल्शियम और प्रोटीन के महत्वपूर्ण स्रोत हैं और सामान्य परिस्थितियों में गर्भावस्था के दौरान इनका सेवन लाभदायक होता है।

इसी तरह यह धारणा भी पूरी तरह गलत है कि प्रसव के समय बाल खोलने से पुत्र का जन्म होता है। बच्चे का लिंग गर्भधारण के समय ही निर्धारित हो जाता है और इसका किसी परंपरा या व्यवहार से कोई संबंध नहीं है। इसके अलावा प्रसव के बाद महिलाओं को पानी कम पीने की सलाह भी गलत है। शरीर की रिकवरी और स्तनपान के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना आवश्यक है। इन सभी मिथकों को केवल वैज्ञानिक जानकारी और जागरूकता के माध्यम से ही दूर किया जा सकता है।

प्रश्न: महिलाओं के स्वास्थ्य को मजबूत बनाने में सरकार की भूमिका को आप किस प्रकार देखती हैं?

उत्तर: पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने मातृ एवं महिला स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिलने से सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने में उल्लेखनीय सफलता मिली है और इसका सकारात्मक प्रभाव मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी के रूप में भी दिखाई दिया है।

आयुष्मान भारत, आरजीएचएस और सीजीएचएस जैसी योजनाओं ने बड़ी संख्या में परिवारों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसवपूर्व जांच, आवश्यक दवाओं और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता भी पहले की तुलना में बेहतर हुई है। यदि आने वाले समय में स्वास्थ्य जागरूकता, निवारक चिकित्सा और आधुनिक स्वास्थ्य अवसंरचना पर लगातार निवेश होता रहा, तो महिलाओं के स्वास्थ्य के क्षेत्र में और अधिक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।

प्रश्न: आरवी हॉस्पिटल के लिए आपका दीर्घकालिक विज़न क्या है?

उत्तर: हमारा उद्देश्य हमेशा से यही रहा है कि प्रत्येक मरीज को नैतिक, गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं मिलें। हमारा मानना है कि अच्छी चिकित्सा केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि मरीज को सम्मान, विश्वास और संवेदनशील देखभाल देना भी है।

आने वाले वर्षों में हम अस्पताल के बुनियादी ढांचे का विस्तार करने, अधिक विशेषज्ञ सेवाएं शुरू करने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। आरवी हॉस्पिटल की स्थापना को अभी कुछ ही वर्ष हुए हैं, लेकिन मरीजों का विश्वास हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है। भविष्य में भी इसी भरोसे को बनाए रखते हुए बेहतर और समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हमारा लक्ष्य रहेगा।

प्रश्न: अंत में, आप चिकित्सा क्षेत्र में आने वाले युवा विद्यार्थियों और मेडिकल अभ्यर्थियों को क्या संदेश देना चाहेंगी?

उत्तर: मेरे लिए चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा का आजीवन संकल्प है। विशेष रूप से प्रसूति एवं स्त्री रोग का क्षेत्र चुनौतीपूर्ण होने के साथसाथ अत्यंत संतोषजनक भी है, क्योंकि यहां एक साथ मां और शिशु दोनों की जिम्मेदारी होती है।

मैं युवा मेडिकल अभ्यर्थियों से यही कहना चाहूंगी कि इस क्षेत्र में सफलता केवल डिग्री से नहीं मिलती। इसके लिए समर्पण, संवेदनशीलता, नैतिकता, धैर्य और निरंतर सीखने की इच्छा आवश्यक है। यदि आपके भीतर लोगों की सेवा करने का जज़्बा और मरीजों के प्रति करुणा है, तो चिकित्सा का क्षेत्र आपको केवल एक सफल करियर देगा, बल्कि समाज के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर भी प्रदान करेगा।



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