नई दिल्ली,
देश में डिजिटल ढांचा मजबूत करने की दिशा में सरकार की बड़ी पहल के तहत भारतनेट योजना के माध्यम से अब तक 2.15 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ दिया गया है। सरकार ने रविवार को जानकारी दी कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में तेज इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने के लिए व्यापक स्तर पर नेटवर्क विस्तार किया गया है। सरकारी बयान के अनुसार देशभर में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार तेजी से हुआ है। वर्ष 2019 में जहां ऑप्टिकल फाइबर बिछाने की लंबाई 19.35 लाख रूट किलोमीटर थी, वहीं वर्ष 2025 तक यह बढ़कर 42.36 लाख रूट किलोमीटर तक पहुंच गई है। इससे गांवों और छोटे कस्बों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है। इसी के साथ देश में 5जी नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार किया गया है। दिसंबर 2025 तक देश के लगभग 99.9 प्रतिशत जिलों में 5जी सेवा पहुंच चुकी है। इसके लिए देशभर में 5.18 लाख से अधिक बेस ट्रांससीवर स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जिससे तेज गति वाली मोबाइल इंटरनेट सेवाओं का लाभ अधिक लोगों तक पहुंच रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस योजना के तहत भी बड़े पैमाने पर काम किया गया है। फरवरी 2026 तक देश में 4,09,111 वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित किए जा चुके हैं। इन हॉटस्पॉट को 207 पब्लिक डेटा ऑफिस एग्रीगेटर और 113 ऐप प्रदाताओं का सहयोग मिल रहा है। इसका उद्देश्य सस्ती और तेज इंटरनेट सुविधा को खासकर गांवों और दूरस्थ इलाकों तक पहुंचाना है। सरकार का कहना है कि अंतिम छोर तक इंटरनेट पहुंच, डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम और सस्ती इंटरनेट सेवाओं को बाजार और सामाजिक योजनाओं से जोड़ने वाले डिजिटल मंचों के साथ एकीकृत करने से ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिल रही है। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंच रहा है और ग्रामीण नागरिकों की डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी भी बढ़ रही है।
देश में डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग को देखते हुए क्लाउड और डाटा सेंटर क्षमता में भी तेजी से वृद्धि की जा रही है। वर्तमान में देश में कुल डाटा सेंटर क्षमता लगभग 1,280 मेगावाट है और अनुमान है कि वर्ष 2030 तक यह क्षमता चार से पांच गुना तक बढ़ सकती है। मेघराज सरकारी क्लाउड मंच के माध्यम से 2,170 से अधिक मंत्रालय और विभाग अपने डिजिटल अनुप्रयोग सुरक्षित और विस्तार योग्य सरकारी क्लाउड प्लेटफॉर्म पर संचालित कर रहे हैं। इससे डिजिटल शासन प्रणाली को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने में मदद मिल रही है। सरकार ने यह भी बताया कि इंटरनेट डाटा की कीमतों में पिछले वर्षों में भारी गिरावट आई है। वर्ष 2014 में जहां एक जीबी डाटा की कीमत लगभग 269 रुपये थी, वहीं वर्ष 2025-2026 में यह घटकर लगभग 8 से 10 रुपये प्रति जीबी रह गई है। सस्ती डाटा सेवाओं के कारण देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। नवंबर 2025 में ब्रॉडबैंड सदस्यता 100 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई, जो एक दशक पहले की तुलना में लगभग छह गुना अधिक है। करीब दस वर्ष पहले यह संख्या केवल 13.15 करोड़ थी।
राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत देशभर के विभिन्न संस्थानों में 38 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 44 पेटाफ्लॉप है। उन्नत कंप्यूटिंग ढांचे को महानगरों से आगे बढ़ाकर विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और उद्योगों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु मॉडलिंग, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा मिल रहा है। सरकार के अनुसार आधार, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस और डिजिलॉकर जैसे डिजिटल सार्वजनिक ढांचे ने इंटरनेट उपयोग को सीधे सामाजिक और आर्थिक लाभों से जोड़ दिया है। इससे सेवाओं की आसान उपलब्धता, वित्तीय समावेशन में वृद्धि और सुरक्षित डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही देश के प्रत्येक नागरिक को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

