Sunday, July 26, 2026 |
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भारतीय शिक्षा बोर्ड के पहले राष्ट्रीय खेल उत्सव की हरिद्वार में जोशपूर्ण शुरुआत

by Business Remedies
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patanjaliहरिद्वार, 09 नवंबर। देवभूमि हरिद्वार की पवित्र भूमि पर आज भारतीय शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित पहले राष्ट्रीय खेल उत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह में योग गुरु स्वामी रामदेव और बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष एन.पी. सिंह ने दीप प्रज्वलित कर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। इस मौके पर देशभर से आए खिलाड़ियों और अतिथियों में विशेष उत्साह देखा गया।

आचार्यकुलम परिसर में आयोजित समारोह में देश के 30 विद्यालयों की 59 टीमों ने मार्च पास्ट के जरिए अपने-अपने राज्यों का प्रतिनिधित्व किया। बच्चों ने स्वामी रामदेव और एन.पी. सिंह का पारंपरिक अभिवादन कर आयोजन की शुरुआत की।

इस अवसर पर स्वामी रामदेव ने कहा कि “बच्चों के निर्माण के लिए समग्र दृष्टि की आवश्यकता है। भारतीय शिक्षा बोर्ड इसी दृष्टिकोण के साथ भारत और भारतीयता का झंडा बुलंद कर रहा है। खेल न केवल शारीरिक विकास का माध्यम हैं, बल्कि यह आत्मबल, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता का भी प्रतीक हैं।”

हरिद्वार के गुरुकुलम और आचार्यकुलम में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ, जिसमें रेसलिंग, जूडो, मलखम, बास्केटबॉल, हैंडबॉल, और कबड्डी जैसी प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया। प्रतिस्पर्धा के पहले ही दिन बच्चों के उत्साह और जोश ने आयोजन को नई ऊर्जा से भर दिया।

भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष एन.पी. सिंह ने बताया कि खेल उत्सव को देशभर में विभिन्न स्थानों पर आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि —

  • 13 और 14 नवंबर को वॉलीबॉल प्रतियोगिता GSS Inter College, आगरा (उत्तर प्रदेश) में होगी।
  • 17 और 18 नवंबर को एथलेटिक्स और बैडमिंटन प्रतियोगिता Lalbagh Isabella Thoburn School, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में आयोजित की जाएगी।
  • वहीं 21 और 22 नवंबर को योग और खो-खो प्रतियोगिता American International School, जयपुर (राजस्थान) में होगी।

एन.पी. सिंह ने कहा कि “खेल विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और चरित्र निर्माण का सशक्त माध्यम हैं। भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए यह पहला अवसर है जब वे राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।”

पहले राष्ट्रीय खेल उत्सव ने न केवल देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्यार्थियों को एक मंच पर जोड़ा है, बल्कि यह भारतीय शिक्षा बोर्ड के उस दृष्टिकोण को भी साकार कर रहा है जिसमें भारतीय संस्कृति, अनुशासन और समग्र शिक्षा का संतुलित संगम दिखाई देता है।



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