बिजऩेस रेमेेडीज खास तौर पर निजी क्षेत्र में नौकरी करने वालों या किसी उद्यमी द्वारा शुरू किए गए किसी वेंचर या नए प्रोजेक्ट में काम करने वालों के लिए, गारंटीड पेंशन की कमी के चलते, रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम की जरूरत अब बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है, ताकि बुढ़ापे में भी वित्तीय सुरक्षा मिल सके। एक अच्छी तरह से तैयार की गई फाइनेंशियल प्लानिंग यह सुनिश्चित करती है कि रिटायरमेंट के दौरान वित्तीय रूप से तनाव की बजाय, आराम और वित्तीय सुरक्षा बनी रहे। एक रिपोर्ट के अनुसार 2050 तक भारत में पुरुषों और महिलाओं के 75 साल और 80 साल से अधिक उम्र तक जीने का अनुमान है। इसका मतलब यह है कि वर्किंग ईयर जिसमें आपको रेगुलर पे चेक मिलता रहता है, के बाद के लिए आपको अपना Retirement Plan ऐसे बनाना चाहिए कि आगे 15-20 साल तक मेडिकल इमरजेंसी और घरेलू खर्च जैसी जरूरतों को पूरा करने के लिए रेगुलर ओल्ड एज इनकम और सुरक्षा मिलती रहे। रिटायरमेंट के बाद की अवधि को ध्यान में रखते हुए, इसे समय नजदीक आने पर नहीं छोड़ा जा सकता
है और इसके बजाय एक फोकस्ड अप्रोच की आवश्यकता है। हमने इसे प्रोग्रेसिव स्टेप में डिवाइड करने का प्रयास किया है।
स्टेप 1 : अपनी रेगुलर इनकम की जरूरतों को तय करना।
अपने अनुमानित खर्चों को समझना और उनकी योजना बनाना रिटायरमेंट के बाद की ठोस इनकम स्ट्रैटेजी का आधार है। इन खर्चों को इस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है:
जरूरी मंथली खर्च : ग्रॉसरी, यूटिलिटीज, ट्रांसपोर्टेशन, हेल्थकेयर और इंश्योरेंस प्रीमियम।
तिमाही और सालाना खर्च : हेल्थ चेकअप, प्रॉपर्टी टैक्स और इंश्योरेंस का रिन्यू।
विवेकाधीन खर्च : शौक (हॉबीज), यात्रा, मनोरंजन और डाइनिंग आउट (बाहर जाकर खाना पीना)।
पीरियॉडिक और लम्प सम जरूरतों पर खर्च : घर का रेनोवेशन, पुरानी कार की जगह नई कार खरीदना, फैमिली फंक्शन या मेडिकल इमरजेंसी।
पारंपरिक समझ तो यह कहती है कि आपको रिटायरमेंट में कम पैसे की आवश्यकता होगी, क्योंकि यह माना जाता है कि रिटायरमेंट के बाद आपकी जरूरतें कम होंगी। लेकिन आज के दौर में रिटायर हुए लोगों की जरूरतें अधिक हैं। वे अपने सपनों को जीने के लिए रिटायरमेंट के बाद के समय का उपयोग करना चाहते हैं, जो उनके पास अपनी नौकरी के दिनों या वर्किंग ईयर्स में कभी नहीं था। रिस्क और रिटर्न को बैलेंस करने वाले स्मार्ट निवेश के साथ अपनी मनपसंद जीवनशैली को बनाए रखना आसान हो सकता है।
भारत में ट्रेडिशनल रिटायरमेंट इनकम सोर्स : जो निवेशक गारंटीड रिटर्न को प्राथमिकता देना चाहते हैं, उनके लिए एन्युटी के मिक्स को प्राथमिकता दी जा सकती है, साथ ही फिक्स्ड डिपॉजिट या सीनियर सिटीजेंस सेविंग्स स्कीम को भी प्राथमिकता दी जा सकती है। हालांकि, ध्यान रखें कि यह विकल्प तुलनात्मक रूप से कम रिटर्न देता है और मैच्योर्ड डिपॉजिट को ऐसी दरों पर फिर निवेश करने का जोखिम उठाता है जो मूलधन की सुरक्षा के लिए एक भौतिक खतरा पैदा करते हैं। आइए देखते हैं कि आप अपने कैश फ्लो आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपनी जरूरतों के अनुसार रेगुलर पेआउट बनाने के लिए Mutual Fund योजनाओं का उपयोग कैसे कर सकते हैं।
सिस्टमैटिक विद्ड्रॉल प्लान (SWP) आपको अपनी खुद की जरूरतों के अनुसार पे चेक बनाने में मदद कर सकता है, जबकि आपकी बचत का शेष हिस्सा आपके लिए कमाई जारी रखने में मदद करता है।
SWP का उपयोग डेट म्यूचुअल फंड, आर्बिट्रेज फंड, मल्टी एसेट और हाइब्रिड इक्विटी स्कीम में भी किया जा सकता है।
आपके रिटायरमेंट प्लान में बचत और निवेश का फेज, समय और एसेट एलोकेशन पर निर्भर करता है। आप जितनी जल्दी प्लानिंग की शुरुआत करेंगे, आपके लक्ष्य तक पहुंचने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। लंबी निवेश अवधि होने से आपको ऐसे विकल्पों में निवेश की अनुमति भी दे सकती है, जो इक्विटी फंड जैसे बेहतर रिटर्न दिला सकते हैं।
स्टेप 2 : होल्डिंग कम करने के फेज में रिटायरमेंट विद्ड्रॉल को ऑप्टिमाइज करना।
अब जब आपने पर्याप्त बचत कर ली है, तो अपनी इस मेहनत के फल का आनंद लेने का समय आ गया है। यह जानना कि अपने पैसे को कैसे निकालना है, उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि इसे कैसे निवेश करना है। नीचे दिए गए फेज का पालन करने से आपको इसे प्रभावी ढंग से स्ट्रक्चर्ड करने में मदद मिलेगी।
स्टेप 3 : टैक्स-एफिशिएंट विद्ड्रॉल अप्रोच।
इन बातों पर विचार किया जा सकता है :
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और एनपीएस से अलग-अलग निकासी से टैक्स बेनेफिट बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
टैक्स एफिशिएंट इक्विटी-ओरिएंटेड Mutual Fund से निकासी को कुशलतापूर्वक स्ट्रक्चर्ड करें ताकि लोअर कैपिटल गेंस टैक्स का लाभ उठाया जा सके।
निष्कर्ष: अपने वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करें।
एक अच्छी तरह से तैयार किया गया रिटायरमेंट इनकम प्लान किसी के लिए फाइनेंशियल फ्रीडम (वित्तीय स्वतंत्रता) और सुरक्षा सुनिश्चित करती है। फिक्स्ड डिपॉजिट, Mutual Fund, एन्युटी और सरकारी योजनाओं में डाइवर्सिफिकेशन के जरिए, आप रिटायरमेंट के बाद एक स्थायी और इनफ्लेशन-पू्रफ पे चेक बना सकते हैं।

