दालियान (चीन): कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उद्देश्य केवल कार्यक्षमता और उत्पादकता बढ़ाना नहीं होना चाहिए, बल्कि लोगों को आत्मचिंतन, रचनात्मकता और अधिक सार्थक मानवीय अनुभवों के लिए भी अवसर प्रदान करना चाहिए। यह बात उद्योग विशेषज्ञों ने मंगलवार को चीन के दालियान में आयोजित World Economic Forum की Annual Meeting Of The New Champions, जिसे Summer Davos के नाम से भी जाना जाता है, के दौरान कही।
कार्यक्रम में कला, तंत्रिका विज्ञान और एआई के संगम को प्रदर्शित करते हुए शोधकर्ताओं और क्यूरेटरों ने बताया कि मस्तिष्क की गतिविधियों को समझने वाली नई प्रौद्योगिकियां इंसानों और मशीनों के बीच अधिक संवेदनशील तथा व्यक्तिगत संवाद स्थापित करने में मदद कर रही हैं। बेंगलुरु साइंस गैलरी की निदेशक जाह्नवी फाल्के ने बताया कि कलाकार इमैनुएल गोलाब द्वारा विकसित यह विशेष स्थापना, जिसे Science Gallery Melbourne के सहयोग से तैयार किया गया है, यह दर्शाती है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव मस्तिष्क से प्राप्त संकेतों की व्याख्या कैसे कर सकती है।
उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी Science Gallery International Network का हिस्सा है और इसका मुख्य उद्देश्य यह दिखाना है कि एआई मानव अनुभवों को अधिक गहराई से समझने में कैसे सहायता कर सकता है। फाल्के के अनुसार, इस प्रणाली में आगंतुक अपने माथे पर चश्मे जैसी एक विशेष युक्ति पहनते हैं। यह युक्ति मस्तिष्क की ईईजी गतिविधियों और विद्युत संकेतों को रिकॉर्ड करती है। इसके बाद एक रोबोटिक संरचना उन संकेतों के आधार पर प्रतिक्रिया देती है, जिससे यह समझा जा सकता है कि व्यक्ति के मन में क्या चल रहा है।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि एआई केवल कार्यों को तेज और आसान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों के लिए अधिक मानवीय, भावनात्मक और अर्थपूर्ण अनुभव भी तैयार कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मस्तिष्क की संवेदनाओं और तंत्रिका गतिविधियों को समझकर बुद्धिमान प्रणालियां लोगों की भावनाओं के अनुरूप प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो सकती हैं। इससे भविष्य में इंसानों और मशीनों के बीच संवाद अधिक स्वाभाविक और सहानुभूतिपूर्ण बन सकता है। Science Gallery Melbourne से जुड़े शोधकर्ता रयान जेफ्रीज़ ने “Doing Nothing With AI” नामक इस स्थापना को कला और विज्ञान का अनूठा संगम बताया। उन्होंने कहा कि यह एक इंटरैक्टिव कलाकृति है, जिसमें ईईजी हेडसेट के माध्यम से मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों को मापा जाता है। इन संकेतों को एक बड़ी रोबोटिक संरचना से जोड़ा जाता है, जो उसी के अनुसार संचालित होती है और गतिविधियां प्रदर्शित करती है।
जेफ्रीज़ ने बताया कि इस कलाकृति का मुख्य उद्देश्य लोगों को कुछ समय के लिए रुकने, अपने विचारों की गति को धीमा करने और अपनी मानसिक स्थिति पर विचार करने के लिए प्रेरित करना है। साथ ही यह अनुभव उन्हें एक बुद्धिमान मशीन के साथ संवाद करते हुए स्वयं को बेहतर ढंग से समझने का अवसर भी प्रदान करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में ऐसी प्रौद्योगिकियां एआई को अधिक मानवीय स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इससे मशीनें केवल निर्देशों का पालन करने वाली प्रणालियां नहीं रहेंगी, बल्कि वे मानवीय भावनाओं, मानसिक अवस्थाओं और व्यक्तिगत आवश्यकताओं को भी बेहतर तरीके से समझ सकेंगी।

