खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद रोजमर्रा उपयोग होने वाले मोबाइल फोन के टैरिफ में बढ़ोतरी कर आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ लाद दिया है। जुलाई माह में ही टेलिकॉम कंपनियों ने मोबाइल टैरिफ में भारी बढ़ोतरी की है। रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने मोबाइल टैरिफ में भारी वृद्धि की है। इससे महंगाई से जूझ रहे आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। जानकारों का कहना है कि इससे शहरी इलाकों में टेलिकॉम सर्विसेज पर खर्च वित्त वर्ष, 2025 में कुल घरेलू खर्च का 2.8 फीसदी हो जाएगा। ग्रामीण परिवारों के लिए यह 4.5 फीसदी से बढक़र 4.7 फीसदी हो जाएगा। लेकिन सरकार और टेलिकॉम रेगुलेटर ट्राई का कहना है कि टेलिकॉम कंपनियां टैरिफ फिक्स करने के लिए स्वतंत्र हैं और उनका इस मामले में हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है। मोबाइल की टैरिफ की बढ़ोतरी के बाद रिलायंस जियो का मिनिमम सर्विस चार्ज 139 रुपए से बढक़र 189 रुपए कर दिया है। इसमें 28 दिन की वैलिडिटी और दो जीबी डेटा शामिल है। इसी तरह एयरटेल और वोडाफोन आइडिया का भी मिनिमम सर्विस चार्ज 179 रुपए से बढक़र 199 रुपए हो गया है। लेकिन सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में महीनेभर के लिए अनलिमिटेड वॉयस और 18 जीबी डेटा के लिए आपको 1.89 डॉलर यानी करीब 157 रुपए खर्च करने पड़ते हैं। यह रेट सरकारी कंपनी बीएसएनएल का है। बीएसएनएल पहले एक प्राइस रेगुलेटर की तरह काम करता था। इससे प्राइवेट कंपनियां टैरिफ बढ़ाने से बचती थीं। लेकिन कंपनी 4-जी और 5-जी सर्विसेज के मामले में निजी कंपनियों के साथ होड़ करने की स्थिति में नहीं है।
वहीं सरकार ने कई देशों में मोबाइल टैरिफ के बारे में डिटेल जानकारी देते हुए भारत से उनकी तुलना की है। इन आंकड़ों के मुताबिक चीन में मिनिमम सर्विस के लिए यूजर्स को 8.84 डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। भारत में टेलिकॉम कंपनियों ने प्रति यूजर औसत राजस्व बढ़ाने के लिए टैरिफ में बढ़ोतरी की है। महंगे 5 फीसदी स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए बहुत ज्यादा पैसे चुकाए हैं, लेकिन अभी तक बहुत कम मोनेटाइजेशन हुआ है। यह नवंबर, 2021 के बाद मोबाइल टैरिफ में पहली बड़ी बढ़ोतरी है।

