बिजनेस रेमेडीज़/जयपुर। पशुपालन, डेयरी एवं गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि मोबाईल वेटरिनरी यूनिट सरकार की बहुत ही महत्वाकांक्षी योजना है जिसका अधिकाधिक लाभ पशुओं और पशुपालकों को मिलना ही चाहिए। इसके लिए हमें हर संभव प्रयास करने चाहिए। मोबाईल वैटेरीनरी यूनिट्स से संबंधित यह चैटबॉट एक नवाचार है निश्चय ही अन्य राज्य भी इससे प्रेरित होंगे। वे मंगलवार को पशुपालन विभाग द्वारा आरएसएलएमटीआई में आयोजित ‘‘1962-एमवीयू राजस्थान’’ (चैटबॉट नंबर 9063475027) तथा योजना की प्रचार सामग्री के लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम में शासन सचिव, पशुपालन, गोपालन एवं मत्स्य डॉ समित शर्मा तथा पशुपालन निदेशक डॉ आनंद सेजरा, बीएफआईएल के कार्यकारी उपाध्यक्ष जे श्रीधरन तथा गोपालन निदेशक प्रह्लाद सहाय नागा भी उपस्थित थे। कुमावत ने बटन दबाकर चैटबॉट का लेकार्पण किया और प्रचार प्रसार सामग्री का भी विमोचन किया।
मंत्री कुमावत ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की एक ही मंशा है कि पशुपालकों को उनके पशुओं के लिए चिकित्सा उनके दरवाजे पर मिले और इसीलिए प्रधानमंत्री ने मोबाइल वैटरिनरी यूनिट की सुविधा पशुपालकों के लिए शुरू करवाई। प्रदेश में एक साल पहले मोबाईल वैटेरिनरी यूनिट्स का संचालन शुरू हुआ था। 1962-कॉल सेंटर को संचालित हुए भी लगभग छ: महीने हो चुके हैं। हालांकि प्रदेश में मोबाईल वैटेरीनरी यूनिट्स द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं की स्थिति संतोषप्रद है लेकिन जिस स्तर पर इसका उपयोग होना चाहिए था वह नहीं हो पा रहा है और हम अपने लक्ष्य से अभी काफी दूर हैं। योजना को प्रदेश के अधिकाधिक पशुपालकों तक पहुंचाने के लिए योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना आवश्यक है। इसके लिए कॉल सेंटर संचालनकर्ता फर्म ‘‘बीएफआईएल’’ जो कि इंडसइंड बैंक की सहायक है, द्वारा योजना के प्रचार-प्रसार हेतु सामग्री तैयार कर उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि इन गतिविधियों में होने वाला व्यय कॉल सेंटर संचालनकर्ता फर्म ‘‘बीएफआईएल’’ द्वारा सीएसआर के अंतर्गत किया जा रहा है तथा इससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा। कुमावत ने कहा कि इस चैटबॉट के माध्यम से पशुपालकों को पशुओं की प्राथमिक चिकित्सा उनके घर पर ही उपलब्ध हो जाएगी जिससे उनके समय, श्रम और पैसे की बचत भी होगी। उन्होंने कहा कि योजनाओं को धरातल पर लाने में मानव श्रम की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है और सरकार आने वाले समय में विभाग में मानव श्रम की कमी को जल्द ही दूर करेगी।
शासन सचिव डॉ समित शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि योजना को व्यापक बनाने, अन्य विभागीय योजनाओं/गतिविधियों को पशुपालकों तक पहुंचाने तथा ए आई आधारित नवाचारों द्वारा पारदर्शिता लाने के लिए व्हाट्स एप आधारित यह विकसित किया गया है। इसमें पशुपालक टेली कंसल्टेंसी के माध्यम से अपने पशुओं की समस्या के उपचार के लिए विशेषज्ञों से सलाह ले सकते हैं। इसे भविष्य में और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा, जिससे विभाग की समस्त सेवाओं को एक ही छतरी के नीचे लाया जा सके। उन्होंने कहा कि देश में सबसे अधिक एमवीयू राजस्थान में हैं। पिछले एक साल में 41 लाख से अधिक पशुओं को चिकित्सा सुविधा इनके माध्यम से उपलब्ध कराई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह एक क्रांतिकारी कदम है और देश में पहली बार इस तरह का नवाचार प्रदेश में किया जा रहा है।

