Monday, July 6, 2026 |
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राजस्थान बनेगा सौर ऊर्जा का पावर हाउस

by Business Remedies
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  • राज्य सरकार ने हाल ही में रखी 10 गीगावॉट उत्पादन की आधारशिला
  • राजस्थान आत्मनिर्भर बनने के साथ ही सौर ऊर्जा निर्यातक भी बनेगा

बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। राजस्थान आने वाले समय में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में पावर हाउस बनने जा रहा है। राजस्थान सरकार ने प्रदेश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर और सरप्लस स्टेट बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक व महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में अक्षय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने और ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सरकार ने अगले वर्ष 10 गीगावॉट ऊर्जा उत्पादन प्रारंभ करने तथा 10 गीगावॉट अतिरिक्त ऊर्जा संयंत्र की स्थापना का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। यह पहल राजस्थान को भारत का अग्रणी ऊर्जा उत्पादक राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

प्रदेश में मजबूत ऊर्जा अवसंरचना के विकास के लिए सरकार ने 765 केवी का एक, 400 केवी के पांच, 220 केवी के 13, 132 केवी के 18 और 33/11 के 133 ग्रिड सब स्टेशन (जीएसएस) के निर्माण की योजना है। इसके साथ ही, राज्यभर में विद्युत लाइनों के विस्तार का कार्य भी किया जाएगा। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। यह कदम न केवल औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगा और घरेलू उपभोक्ताओं को भी सस्ती और सुलभ बिजली प्रदान करेगा।

ऊर्जा उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि, राजस्थान बनेगा ऊर्जा निर्यातक : राजस्थान सरकार का विजन सिर्फ आत्मनिर्भर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राज्य को सौर ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी बनाने का भी लक्ष्य है। हाल ही में उप मुख्यमंत्री (वित्त) ने घोषणा की थी कि आगामी वर्ष में 6400 मेगावाट अतिरिक्त ऊर्जा उत्पादन किया जाएगा। इसके अलावा 5700 मेगावाट की नई ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा गया है। यह निर्णय राजस्थान को न केवल आत्मनिर्भर बनाएगा बल्कि इसे एक प्रमुख ऊर्जा निर्यातक राज्य के रूप में स्थापित करेगा, जिससे अन्य राज्यों को भी सस्ती और सुलभ ऊर्जा मिल सकेगी। राज्य सरकार के इन प्रयासों से निवेशकों और उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे राजस्थान में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में इस प्रगति से राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

राजस्थान सोलर एसोसिएशन ने भी की सरकार के प्रयासों की सराहना: राजस्थान सोलर एसोसिएशन (आरएसए) ने सरकार की इस दूरदर्शी नीति की सराहना करते हुए कहा है कि प्रदेश में उन्नत और सशक्त ग्रिड अवसंरचना का निर्माण अक्षय ऊर्जा परियोजना को नई गति देगा। राजस्थान पहले ही सौर ऊर्जा उत्पादन में देश में अग्रणी है और सरकार की इस पहल इसे भारत का ऊर्जा हब बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। राजस्थान सोलर एसोसिएशन के अनुसार, राजस्थान में अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियां और मजबूत ग्रिड नेटवर्क के कारण राज्य अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है। सरकार की यह नीति निवेशकों के विश्वास को और अधिक मजबूत करेगी, जिससे राजस्थान को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक पहचान मिलेगी।

ऊर्जा क्रांति की दिशा में राजस्थान अग्रणी: राजस्थान सरकार की ओर से लिए गए इस फैसले प्रदेश के औद्योगिक और ग्रामीण क्षेत्रों को नई ऊर्जा मिलेगी। यह ऊर्जा क्रांति न केवल आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी प्रोत्साहन देगी। राजस्थान सोलर एसोसिएशन ने इस अवसर पर कहा कि यह निर्णय राज्य की दीर्घकालिक विकास यात्रा में नए ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा। आने वाले वर्षों में राजस्थान हरित ऊर्जा का वैश्विक केंद्र बनेगा और देश को स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान देगा। राजस्थान की यह ऊर्जा नीति राज्य के विकास की नई विकास गाथा लिखेगी और इसे नवीकरणीय ऊर्जा का हब बनाएगी। सरकार की यह पहल भारत के ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

– जिस हिसाब से राजस्थान सरकार किसानों के उत्थान के लिए कुसुम योजना चला रहा है। साथ ही राजस्थान के डवलपर सहयोग दे रहे हैं। यह माइल स्टोन साबित होगा और यह राजस्थान की एनर्जी के इतिहास को बदल देगा। जैसे की राजस्थान में सौर ऊर्जा का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है। पूरे विश्व में सौर ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख केंद्र हैं। जो हमारे लिए कभी अभिशाप था, वह आज वरदान बन चुका है। राजस्थान के लिए कभी दो अभिशाप थे। इनमें एक रेगीस्तानी भूमि और दूसरसे यहां सबसे ज्यादा गर्मी पड़ती थी। आज यही रेतीली जमीन और तेज गर्मी राजस्थान के लिए वरदान साबित हो रही है। अभी हाल ही में राजस्थान सरकार के साथ 35 लाख करोड़ के एमोयू हुए हैं। इनमें से 28 लाख के एमओयू सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में हुए हैं। आगामी दिनों में यह राजस्थान के लिए गेम चेजिंग होगा।
-नीतिन अग्रवाल, सीईओ, राजस्थान सोलर एसोसिएशन

– राजस्थान सौर ऊर्जा में अग्रणी राज्य है। मगर यह प्रगति बड़े ग्राउंड-माउंटेड प्रोजेक्ट्स और सेकी जैसी एजेंसियों के प्रोजेक्ट्स पर टिकी है। राज्य को लैंड बैंक बनाया जा रहा है, पर बिजली, रोजगार और आर्थिक लाभ में हिस्सेदारी कम है। रूफटॉप सौर ऊर्जा इस कमी को पूरा कर सकती है। यह डिस्कॉम की हानि घटाएगा, ट्रांसमिशन पर दबाव कम करेगा और स्थानीय रोजगार बढ़ाएगा। पीएम सूर्यघर योजना से नागरिकों को सब्सिडी का फायदा भी मिलेगा। सरकार को उपेक्षित रूफटॉप सेक्टर पर ध्यान देना चाहिए। सिर्फ आंकड़े बढ़ाने से नहीं, वास्तविक विकास से राजस्थान चमकेगा।
– अजय यादव, अध्यक्ष, राजस्थान अक्षय ऊर्जा संघ (रियर)

– जो एमओयू हुए हैं, वे धरातल पर आ रहे हैं। लोग इन एमओयू के अंदर काम भी कर रहे हैं। लेकिन हमारे पावर प्लांट का इंफ्रा है उसमें अभी कैपिबिलटी नहीं है। इसलिए डिस्कॉम को सरकार को यह देखना होगा कि सौर ऊर्जा डवलपर्स को किसी प्रकार की परेशानी न हो। वहां पर ट्रिपिंग नहीं हो। साथ ही चौबीसों घंटे तक सोलर पावर ऑन रहनी चाहिए, जिससे निर्बाध गति से ऊर्जा का उत्पादन हो सके। वोल्टेज के फ्लेक्चुएशन न आए। ऐसा होगा तो सोलर प्रोजेक्ट रियल टाइम पॉवर दे पाएंगे तभी उनके लिए प्रोजेक्ट लाभप्रद रहेगा। सोलर प्रोजेक्ट को लाभप्रद बनाने के लिए डिस्कॉम को और काम करना होगा। साथ ही कुसुम योजना पर और काम करने की आवश्यकता है।
– प्रतीक अग्रवाल, मैनेजिंग डायरेक्टर, सोलर 91 क्लीनटेक लिमिटेड



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