बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। राजस्थान, जिसे अक्सर एक उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में महिमामंडित किया जाता है। निवेशकों के लिए अवसरों की भूमि के रूप में खुद को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है। आधुनिक बुनियादी ढांचे, प्रचुर संसाधनों और आसान कनेक्टिविटी के भव्य दावों के साथ, सरकारी मशीनरी ने औद्योगिक विकास की एक उज्जवल तस्वीर पेश की है। हालांकि, इस चमकदार छवि के पीछे एक अलग वास्तविकता है—एक मृगतृष्णा, जो संभावित निवेशकों को भ्रमित कर सकती है।
बुनियादी ढांचे की कमी: महत्वाकांक्षी दावों के बावजूद, राजस्थान के औद्योगिक परिदृश्य की जमीनी हकीकत उपेक्षा और अधूरे वादों की कहानी बयां करती है। कई औद्योगिक क्षेत्रों में सडक़ों, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं या तो खराब हैं या कुछ मामलों में पूरी तरह से अनुपस्थित हैं।
1. खराब सडक़ें और कनेक्टिविटी
औद्योगिक हब अक्सर दूरस्थ या खराब जुड़े क्षेत्रों में स्थित होते हैं, जहां अपर्याप्त या खराब रखरखाव वाली सडक़ें होती हैं। इससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स पर बुरा असर पड़ता है, जिससे व्यवसायों के लिए सुचारू संचालन करना मुश्किल हो जाता है। जो बुनियादी ढांचा मौजूद है, वह भी टुकड़ों में है, जिसमें गड्ढों से भरी सडक़ें और अधूरे हाइवे प्रोजेक्ट हैं। जो कि औद्योगिक क्षेत्र के ब्रोशन में दिखाई गई अच्छी सडक़ों से बहुत दूर हैं।
2. पानी की कमी राजस्थान अपने शुष्क जलवायु के लिए जाना जाता है, फिर भी पानी उद्योगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संसाधनों में से एक है। इसके बावजूद, कई औद्योगिक क्षेत्रों में तीव्र जल संकट है, जहां भूजल तक सीमित पहुंच और पानी की अनियमित आपूर्ति होती है। कुछ क्षेत्रों में, उद्योगों को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे परिचालन लागत बढ़ जाती है और यह लंबे समय तक अस्थिर हो जाता है। जल आपूर्ति योजनाओं के वादे अक्सर अधूरे रहते हैं, जिससे व्यवसायों को इस बुनियादी मुद्दे से जूझना पड़ता है।
3. बिजली आपूर्ति में अनियमितता किसी भी उद्योग के लिए सतत बिजली आपूर्ति आवश्यक है, लेकिन राजस्थान के कई क्षेत्रों में बार-बार बिजली कटौती होती है। विशेष रूप से छोटे औद्योगिक समूहों में बिजली का बुनियादी ढांचा पुराना है, जिससे उत्पादन में व्यवधान होता है। जबकि राज्य अपने सौर ऊर्जा के संभावित उपयोग का प्रचार करता है, जमीनी हकीकत यह दिखाती है कि नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों का क्रियान्वयन बहुत कम है।
निवेशकों के लिए एक झूठी तस्वीर: राज्य सरकार ने राजस्थान को एक औद्योगिक पावरहाउस के रूप में दिखाने के लिए बड़े पैमाने पर विपणन अभियान चलाए हैं। आकर्षक वीडियो और सुंदर पुस्तिकाएं आधुनिक औद्योगिक पार्कों, विश्वस्तरीय सुविधाओं और मजबूत बुनियादी ढांचे का चित्रण करती हैं। हालांकि, ये छवियां अक्सर वास्तविकता से काफी दूर होती हैं। निवेशकों को सब्सिडी, प्रोत्साहन और व्यापार-अनुकूल माहौल के वादों के साथ लुभाया जाता है, लेकिन एक बार जब वे परिचालन शुरू करते हैं, तो उन्हें देरी, नौकरशाही की समस्याएं और बुनियादी ढांचे की कमी का सामना करना पड़ता है।
जो उद्योगपति पहले से ही राजस्थान में निवेश कर चुके हैं, वे इस भ्रामक छवि से निराश हैं। राज्य की सरकार अपने वादों पर खरा उतरने में विफल रही है और लालफीताशाही और अयोग्यता ने प्रगति में बाधा डाली है। सरकार के वादों और वास्तविक स्थिति के बीच यह डिसकनेक्ट कई व्यवसायों में निराशा का कारण बना है।
सरकार करे औद्योगिक क्षेत्रों का वास्तविक मूल्यांकन: राजस्थान के बाजार में प्रवेश करने वाले किसी भी निवेशक के लिए सतर्क दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। सरकार द्वारा दिखाया गया प्रचार अक्सर एक सावधानीपूर्वक निर्मित मृगतृष्णा होता है। महत्वपूर्ण पूंजी लगाने से पहले, निवेशकों को औद्योगिक क्षेत्रों का दौरा करके स्थिति का वास्तविक मूल्यांकन करना चाहिए। स्थानीय व्यवसाय मालिकों से सीधे बात करना, उनके सामने आने वाली चुनौतियों को समझना और बुनियादी ढांचे की सीमाओं को स्वयं देखना एक सूचित निर्णय लेने के लिए आवश्यक है। निवेशकों को इसके लिए भी तैयार रहना होगा कि उन्हें नौकरशाही में देरी, नियामक अड़चनें और स्थानीय अधिकारियों से समर्थन की कमी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर दूरस्थ क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने के लिए राजस्थान के क्षेत्रीय मुद्दों को गहराई से समझना और उचित सतर्कता बरतना जरूरी है।
आज से विरोध प्रदर्शन
सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र से सटे प्रहलाद पुरा औद्योगिक क्षेत्र में बुनियादी ढांचे में कमी व असुविधाओं को लेकर असंतुष्ट उद्यमी अब आंदोलन करने की तैयारी में हैं। मानसून के इस सीजन में तो क्षेत्र में इतनी बुरी स्थिति है कि उद्यमियों का आवागमन भी मुश्किल हो पा रहा है। इन्हीं असुविधाओं से परेशान होकर अब क्षेत्र के उद्यमी आज से सविनय आंदोलन शुरू कर रहे हैं।
आंदोलन के साथ-साथ सरकार को भी क्षेत्र के विकास के लिए सरकार व रीको को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा। उद्यमियों ने बताया, वर्ष 2013-14 में प्रहलादपुरा औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया गया था। इस क्षेत्र से गुजर रही रेलवे लाइन के पास पहुंच को आसान बनाने के लिए मुख्य मार्ग विकसित करना था, लेकिन यह आज तक नहीं बना। रीको ने इस कार्य के लिए जेडीए को मांग राशि का अग्रिम भुगतान भी काफी समय पहले किया जा सकता है। इस मार्ग के संकरे होने व गहरे गड्ढों के कारण क्षेत्र में आने वाले भारी वाहन भी फंस जाते हैं। इन सभी परेशानियों की जानकारी संबंधित विभागों को दी जा चुकी है। क्षेत्र की एसोसिएशन ने इस समस्या को राज्य के सभी शीर्ष औद्योगिक मंचों पर भी उठाया जा चुका है। परेशान उद्यमियों ने अब आंदोलन का मन बना लिया है और आज से सविनय आंदोलन शुरू किया जा रहा है।
क्षेत्र की दुर्दशा से सभी उद्यमी परेशान हैं। सुनवाई नहीं होने के कारण ही आंदोलन शुरू किया जा रहा है। सरकार इतने बड़े-बड़े कार्यक्रम कर रही है। रिसर्जेंट राजस्थान सहित कई कार्यक्रम अभी होने हैं। सरकार इसके लिए देश-दुनिया में घूम रही है, लेकिन लोकल इश्यूज सुलझ नहीं रहे हैं। सरकार नई इंडस्ट्री लगाने की बात तो कर रही है, जो लगी हुई हैं। उन तक पहुंचने का मार्ग तक नहीं है। प्रहलाद पुरा में 8-10 साल से लोग परेशान हो रहे हैं। सरकार कमेटी बनाकर इन समस्या को सुलझाए, लेकिन सरकार अधिकारी सुनने को राजी नहीं है। हम इसीलिए
कुंजेश कुमार पतसारिया

