Tuesday, June 30, 2026 |
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देश के 300 जिलों में सूखे का खतरा!

देश व प्रदेश में व्यापार होगा प्रभावित

by Business Remedies
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  • आगामी महीनों में अल नीनो के सक्रिय होने की 90 प्रतिशत संभावना
  • दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और राजस्थान में सामान्य बारिश नहीं

नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क | जलवायु परिवर्तन और मौसम के बदलते मिजाज ने एक बार फिर भारत समेत पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ा दी हैं। United Nations के महासचिव Antonio Guterres की हालिया चेतावनी और El Niño को लेकर आई एक नई रिपोर्ट ने भारत के कृषि और व्यापारिक क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आगामी महीनों में El Niño के सक्रिय होने की 90 प्रतिशत संभावना है। इसके चलते आने वाले समय में नवंबर तक धरती धधकेगी यानी भीषण गर्मी का प्रकोप जारी रहेगा।

12 राज्यों के कई जिलों में गंभीर संकट

शुरुआती आकलनों में भारत के 111 जिलों को El Niño से सबसे ज्यादा प्रभावित माना जा रहा था, लेकिन अब यह भयावह आंकड़ा बढ़कर 12 राज्यों के करीब 300 जिलों तक पहुंच चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों— Delhi, Uttar Pradesh, Bihar, Punjab और Rajasthan में इस बार सामान्य बारिश नहीं होने की आशंका है। इसके अलावा, जिन 12 राज्यों में हालात सबसे ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं, उनमें शामिल हैं— Madhya Pradesh, Maharashtra, Gujarat, Uttar Pradesh, Rajasthan, Karnataka, Bihar, Jharkhand, Telangana, Andhra Pradesh और Odisha शामिल हैं।

कृषि संकट और बढ़ती महंगाई का खतरा

भारत में कृषि सीधे तौर पर मानसून पर निर्भर करती है। ऐसे में पर्याप्त बारिश न होने के कारण कृषि से संबंधित तमाम व्यापार बुरी तरह प्रभावित होंगे।

फसलों को नुकसान : खरीफ और आगामी रबी फसलों के उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।

महंगाई की मार : अनाज, दलहन और सब्जियों की पैदावार घटने से बाजार में खाद्य वस्तुओं की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा और गहरा गया है।

व्यापारिक मंदी : ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर होने से देश और प्रदेश स्तर पर व्यापारिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी पड़ जाएगी।

वैश्विक हाहाकार और प्राकृतिक आपदाएं

यह संकट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। United Nations प्रमुख के अनुसार, दुनिया के कई देशों में इस समय भीषण गर्मी के कारण लोगों की मौतें हो रही हैं। El Niño के प्रभाव से वैश्विक स्तर पर मौसम का संतुलन बिगड़ रहा है। इससे एक तरफ जहां भयानक सूखा और भीषण गर्मी पड़ेगी, वहीं दूसरी तरफ कुछ हिस्सों में अत्यधिक बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी तेजी से बढ़ेगा।

केंद्र सरकार की मुस्तैदी : मंत्रालयों ने कसी कमर

इस भावी संकट की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। सरकार के कृषि मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मिलकर अभी से सूखा प्रबंधन और राहत कार्यों की तैयारी शुरू कर दी है।

मुख्य फोकस

  • सिंचाई के वैकल्पिक साधनों को मजबूत करना।
  • संकटग्रस्त जिलों के लिए आकस्मिक योजनाएं तैयार करना।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार गारंटी योजनाओं (जैसे मनरेगा) के तहत राहत कार्यों को सुनिश्चित करना ताकि किसानों और मजदूरों का पलायन रोका जा सके।

जून में सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज

India Meteorological Department के अनुसार 1 से 28 जून के बीच देश में सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। इस अवधि में औसतन 141.8 मिमी बारिश होती है, लेकिन इस बार केवल 80.4 मिमी वर्षा हुई। मध्य भारत में 57 प्रतिशत, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में 44 प्रतिशत, दक्षिण भारत में 30 प्रतिशत तथा उत्तर-पश्चिम भारत में 27 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। मानसून की धीमी प्रगति के कारण खरीफ फसलों पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

Rajasthan के लिए El Niño का खतरा सबसे ज्यादा है। Rajasthan जैसे प्रदेश में वैसे ही पानी की कमी है। इसके लिए राज्य सरकार को सजग रहकर योजनाएं बनानी होंगी और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के लिए रोजगार सृजन करने होंगे, जिससे शहरी क्षेत्रों तक पलायन रुके। वहीं कम बारिश के चलते व्यापार भी प्रभावित होगा। दूसरा राज्य सरकार बिजली व पानी को संकट से निपटने के लिए बचाकर रखे।

Suresh Agrawal, अध्यक्ष, FORTI



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