शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, देश भर के स्कूलों में लड़कियां लडक़ों से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में लड़कियों का पासिंग प्रतिशत लडक़ों से ज्यादा है। साइंस और आर्ट्स स्ट्रीम दोनों में लड़कियां आगे हैं। यह ट्रेंड कॉलेज परीक्षाओं और प्रोफेशनल एग्जाम्स में भी देखा जा रहा है।
शिक्षा मंत्रालय की ओर से किया गया 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं का विश्लेषण कई गंभीर मसलों की ओर ध्यान खींचता है, लेकिन इसका सबसे अहम पहलू है स्कूलों में लड़कियों की ओर से लिखी जा रही कामयाबी की सुनहरी कथाएं। यह लगातार दूसरा साल है जब शिक्षा मंत्रालय ने देश के 59 स्कूल बोर्डों के रिजल्ट्स का विश्लेषण करते हुए अपनी रिपोर्ट पेश की है।
समाज में और परिवार के अंदर लड़कियों को जिस पूर्वाग्रह भरी दृष्टि का सामना करना पड़ता है उसका एक ज्वलंत उदाहरण रिपोर्ट में इस तथ्य के रूप में उभरता है कि देश भर में प्राइवेट स्कूलों में लडक़ों और सरकारी स्कूलों में लड़कियों की संख्या ज्यादा है। साफ है कि मां-बाप चाहते हैं बेटे ज्यादा अच्छी और महंगी शिक्षा पाएं। बेटियों को जैसे-तैसे पढ़ा देना काफी माना जाता है।
दिलचस्प है कि यह पूर्वाग्रह लड़कियों के जज्बे को कमजोर करने के बजाय उसे और मजबूती दे रहा है। रिजल्ट्स का विश्लेषण बताता है कि बोर्डों, स्कूलों और विषयों के भेदों से ऊपर उठते हुए लड़कियां, लडक़ों से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। 10वीं और 12वीं दोनों में, चाहे स्टेट बोर्ड हों या नैशनल और चाहे प्राइवेट स्कूल हों या सरकारी, लड़कियों का पासिंग पर्सेटेंज लडक़ों से काफी ज्यादा है।
जहां तक स्ट्रीम सिलेक्शन की बात है तो साइंस आज भी सबसे लोकप्रिय है। करीब 43 प्रतिशत स्टूडेंट्स साइंस स्ट्रीम में अपीयर हुए और 34 प्रतिशत आर्ट्स स्ट्रीम में थे। खास बात यह कि साइंस में लडक़ों की बहुलता थी जबकि आर्ट्स में लड़कियों की। लेकिन पासिंग पर्सेंटेज देखें तो लड़कियां न सिर्फ आर्ट्स में बल्कि साइंस में भी लडक़ों से आगे नजर आती हैं।
स्कूल स्तर पर यह जो ट्रेंड इस रिपोर्ट में दिख रहा है, वह अन्य तमाम क्षेत्रों में उभरते नए ट्रेंड से मेल खा रहा है। चाहे कॉलेजों की परीक्षाओं की बात हो या हृश्वश्वञ्ज और छ्वश्वश्व जैसी प्रफेशनल कोर्स वाली परीक्षाओं की, हर जगह ट्रेंड यही दिखता है कि महिलाएं न सिर्फ अपनी संख्या बढ़ा रही हैं बल्कि प्रदर्शन में भी लगातार सुधार दर्ज करा रही हैं।
निश्चित रूप से यह एक हेल्दी ट्रेंड है। लड़कियों के आगे बढऩे का मतलब उनके आत्मविश्वास का बढऩा है, उनका ज्यादा असर्टिव होना है। ऐसी लड़कियां परिवार के अंदर या वर्कप्लेस पर अपनी सही जगह न सिर्फ चाहती हैं बल्कि उसे हासिल करती हैं। उम्मीद है कि अच्छी पढ़ाई के बाद जब ये लड़कियां पेशेवर जिंदगी शुरू करें तो वहां उनके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा।

