हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आज विश्व ओजोन दिवस मनाया जाएगा। यह दिवस हमें उस अदृश्य सुरक्षा कवच की याद दिलाता है, जो पृथ्वी पर जीवन को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (यूवी) किरणों से बचाता है। वर्ष, 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए जाने की स्मृति में यह दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य केवल ओजोन परत के संरक्षण का संदेश देना नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति वैश्विक जिम्मेदारी का बोध कराना भी है। किरणें बढऩे से हर साल दुनिया में 1.3 लाख से ज्यादा मेलानोमा स्किन कैंसर के नए मामले और 66 हजार मौतें होती हैं। ओजोन परत के क्षरण से पृथ्वी तक पहुंचने वाली पराबैंगनी किरणों की मात्रा बढ़ सकती है। इसका सीधा प्रभाव मानव स्वास्थ्य, कृषि, समुद्री पारिस्थितिकी और जैव-विविधता पर पड़ता है। इसलिए विश्व ओजोन दिवस हमें यह समझने का अवसर देता है कि पर्यावरण की रक्षा किसी एक देश या संस्था की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की साझा जिम्मेदारी है। इसकी जागरूकता की शुरुआत घर और विद्यालय से होनी चाहिए। लोगों को रेफ्रिजरेटर, एयर-कंडीशनर और अन्य उपकरणों के जिम्मेदार उपयोग तथा उनकी गैसों के सुरक्षित निपटान के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए। अनावश्यक ऊर्जा खपत कम करना और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाना भी महत्वपूर्ण है। वहीं सरकार को ओजोन-हानिकारक रसायनों के उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण, पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को प्रोत्साहन और नियमों के कड़ाई से पालन की व्यवस्था करनी चाहिए। उद्योगों को भी स्वच्छ और सुरक्षित विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना आवश्यक है। ओजोन परत के क्षरण से त्वचा कैंसर, आंखों की बीमारियों और प्रतिरक्षा-तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव का खतरा बढ़ता है। इसलिए विश्व ओजोन दिवस केवल एक औपचारिक अवसर नहीं, बल्कि भविष्य की पीढिय़ों के लिए पृथ्वी को सुरक्षित रखने का संकल्प है। ओजोन की रक्षा वास्तव में जीवन की रक्षा है।

