भारतीय एविएशन सेक्टर पिछले पांच वर्षों में तेजी से उभरा है। इसने दुनिया को दिखा दिया है कि हम भी निरंतर बढ़ते बाजारों में शामिल हैं। सरकार अब केवल हवाई यात्रा बढ़ाने पर नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक एविएशन हब बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। संभवतय: जल्द ही वह इस ओर कदम बढ़ा लेगा। इसके लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है कि नई-नई योजनाएं लाकर इसे मजबूत करें। वर्ष, 2026-27 से 2035-36 तक 28,840 करोड़ रुपए के बजट के साथ संशोधित उड़ान योजना लागू की जा रही है। इसका लक्ष्य छोटे शहरों तक सस्ती हवाई सेवाएं पहुंचाना, 100 नए हवाई अड्डों का विकास, 200 आधुनिक हेलिपैड बनाना और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। इसके अलावा एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने का है, इसमें नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, टर्मिनलों का आधुनिकीकरण और क्षमता बढ़ाने पर निवेश करना है। एमआरओ हब विकसित करने पर भी फोकस है, ताकि विमान मरम्मत के लिए विदेशों पर निर्भरता कम हो सके। डिजिटल एविएशन जैसी सुविधाओं से यात्रियों के लिए तेज और संपर्क रहित यात्रा अनुभव विकसित किया जा रहा है। घरेलू विमान निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एचएएल के डोर्नियर और ध्रूव हेलीकॉप्टर जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जहां भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है। परिचालन वाले हवाई अड्डों की संख्या वर्ष, 2014 के 74 से बढक़र जुलाई, 2026 तक 165 हो गई है। विजन 2047 के तहत देश में एयरपोर्ट्स की संख्या बढ़ाकर 350 से 400 तक करने का लक्ष्य है, जिससे इस क्षेत्र में ऐतिहासिक आर्थिक उछाल आएगा। भारतीय एविएशन सेक्टर तेज विस्तार के दौर में है।

