चारु भाटिया | जयपुर | गर्भावस्था और मातृत्व किसी भी महिला के जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी पड़ावों में से एक हैं। इस दौरान केवल आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ ही पर्याप्त नहीं होतीं, बल्कि संवेदनशीलता, विश्वास और निरंतर सहयोग भी उतने ही आवश्यक होते हैं। पिछले दो दशकों में स्त्री एवं प्रसूति रोग विज्ञान (ऑब्स्टेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी) के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इसके बावजूद गर्भावस्था, प्रसव और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े कई मिथक आज भी समाज में प्रचलित हैं।
इस विशेष साक्षात्कार में जयपुर के मेट्रो MAS अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नीतू राजवंशी ने चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी प्रेरणादायक यात्रा साझा की। उन्होंने महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं में वर्षों के दौरान आए बदलावों, गायनेकोलॉजी में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका, गर्भावस्थासेजुड़ेप्रचलितमिथकोंऔरउनकीवास्तविकतापरविस्तारसेचर्चाकी।
प्रश्न: आप जयपुर के मेट्रो MAS अस्पताल में एक प्रतिष्ठित स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ हैं। कृपया अब तक की अपनी यात्रा और प्रेरणा के बारे में बताइए।
उत्तर: अगर मैं अपनी यात्रा को पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो महसूस करती हूँ कि चिकित्सा हमेशा से मेरे जीवन का हिस्सा रही है। मेरे बड़े भाई और बड़ी बहन दोनों डॉक्टर हैं, इसलिए मैं ऐसे माहौल में पली–बढ़ी जहाँ लोगों की सेवा स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से करना रोज़मर्रा की बात थी।
बचपन से ही मेरा सपना डॉक्टर बनने और आगे चलकर सर्जन बनने का था। मेडिकल शिक्षा के दौरान मेरा झुकाव स्वाभाविक रूप से स्त्री एवं प्रसूति रोग (ऑब्स्टेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी) की ओर हो गया।
इस दुनिया में एक नए जीवन को जन्म लेते देखना मुझे हमेशा आकर्षित करता था। प्रसव का अनुभव चिकित्सा जगत के किसी भी अन्य क्षण से बिल्कुल अलग होता है। यह भावनात्मक, जीवन बदलने वाला और बेहद संतोष देने वाला अनुभव है।
हर सफल प्रसव के साथ यह संतुष्टि मिलती है कि आप किसी परिवार की सबसे खूबसूरत याद का हिस्सा बने हैं। यही भावना मुझे इस क्षेत्र में लेकर आई और तब से मैं महिलाओं के जीवन के हर चरण में पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ उनकी सेवा कर रही हूँ।
प्रश्न: आपके अनुसार गायनेकोलॉजी के क्षेत्र में किस प्रकार बदलाव आया है?
उत्तर: इस क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिले हैं। पहले प्रसव को केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया माना जाता था, लेकिन आज यह पूरे परिवार के लिए एक खास अवसर बन गया है, जिसमें सभी सदस्य नवजात का स्वागत करने के लिए उत्साहित रहते हैं।
चिकित्सकीय दृष्टि से सबसे बड़ा बदलाव पारंपरिक ओपन सर्जरी से मिनिमली इनवेसिव सर्जरी की ओर हुआ है। लैप्रोस्कोपिक सर्जरी ने दर्द, रक्तस्राव और रिकवरी का समय कम करके मरीजों के परिणामों में काफी सुधार किया है। रोबोटिक सर्जरी भी धीरे–धीरे गायनेकोलॉजी में अपनी जगह बना रही है, जिससे जटिल ऑपरेशन अधिक सटीकता के साथ किए जा सकते हैं। इसके साथ ही बेहतर डायग्नोस्टिक तकनीकों और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित उपचार पद्धतियों ने महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया है।
प्रश्न: गायनेकोलॉजी में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग को आप कैसे देखती हैं?
उत्तर: तकनीक ने निस्संदेह स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन प्रसूति विज्ञान ऐसा क्षेत्र है जहाँ मानवीय संवेदनाओं की जगह कोई नहीं ले सकता। बच्चे का जन्म केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसमें भावनाएँ, अनुभव, सही निर्णय, संवाद और संवेदनशील देखभाल शामिल होती है। इन गुणों की जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नहीं ले सकता। हालाँकि, AI और नई तकनीकें सर्जरी की योजना बनाने, ऑपरेशन के दौरान सटीकता बढ़ाने और जटिल प्रक्रियाओं में बेहतर परिणाम देने में निश्चित रूप से मदद कर सकती हैं। ये बेहतर इमेजिंग, निदान और मरीजों की निगरानी में भी उपयोगी हैं। लेकिन गर्भावस्था और प्रसव के समय एक अनुभवी डॉक्टर की विशेषज्ञता, अनुभव और संवेदनशीलता ही सबसे महत्वपूर्ण रहती है।
प्रश्न: गर्भावस्था से जुड़े ऐसे कौन–से आम मिथक हैं जिन्हें आप दूर करना चाहेंगी?
उत्तर: दुर्भाग्य से आज भी गर्भावस्था और प्रसव के बाद की अवधि से जुड़े कई भ्रम, विशेष रूप से हमारे समाज में, मौजूद हैं। एक आम धारणा है कि गर्भवती महिलाओं को दूध और दुग्ध उत्पादों से बचना चाहिए। वास्तव में दूध, दही और छाछ कैल्शियम, प्रोटीन और लाभकारी प्रोबायोटिक्स के उत्कृष्ट स्रोत हैं। ये पोषक तत्व शिशु की हड्डियों के विकास और माँ के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इसी तरह पपीता और अनानास जैसे फलोंको लेकर भी कई भ्रांतियाँ हैं, लेकिन पौष्टिक डेयरी उत्पादों से परहेज करने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
प्रसव के बाद भी कई गलत धारणाएँ प्रचलित हैं। कुछ परिवार नई माँ को पर्याप्त पानी पीने, सामान्य भोजन जैसे रोटी खाने या टीवी देखने तक से मना करते हैं। इन बातों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। प्रसव के बाद महिला को पर्याप्त पानी, पौष्टिक भोजन, पर्याप्त आराम और भावनात्मक सहयोग की आवश्यकता होती है ताकि वह जल्दी स्वस्थ हो सके।
एक और महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर अनदेखा किया जाने वाला पहलू मानसिक स्वास्थ्य है। प्रसवोत्तर अवसाद (पोस्टपार्टम डिप्रेशन) एक वास्तविक चिकित्सीय स्थिति है जो कई महिलाओं को प्रभावित करती है। परिवार के सदस्यों को भावनात्मक बदलावों को समय रहते पहचानना चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर सहयोग तथा उचित चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।
प्रश्न: आज की जीवनशैली ने महिलाओं के स्वास्थ्य को किस प्रकार प्रभावित किया है?
उत्तर: जीवनशैली में आए बदलावों का महिलाओं के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ा है, विशेषकर कोविड-19 महामारी के बाद। आज कई लोगों की नींद अनियमित है, जंक फूड का सेवन बढ़ गया है और शारीरिक गतिविधि कम हो गई है। किशोरियों और युवा महिलाओं में हार्मोनल समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। बढ़ता मोटापा PCOS के मामलों में वृद्धि का प्रमुख कारण बना है। अब इसे PMOS के रूप में भी देखा जा रहा है क्योंकि इसमें मेटाबॉलिक गड़बड़ियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। व्यायाम की कमी इन समस्याओं को और बढ़ा देती है।
देर से विवाह और गर्भधारण को टालने की प्रवृत्ति के कारण भी बांझपन के मामलों में वृद्धि हो रही है। उम्र का प्रजनन क्षमता पर सीधा प्रभाव पड़ता है और यह बदलाव अब क्लिनिकल प्रैक्टिस में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। तनाव भी हार्मोनल संतुलन, मासिक धर्म और प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारण है।
प्रश्न: एक गायनेकोलॉजिस्ट के रूप में मरीजों का इलाज करते समय कौन–से गुण सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं?
उत्तर: मैं पिछले 26 वर्षों से स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्य कर रही हूँ और आज भी हर मरीज मुझे कुछ नया सिखाता है। चिकित्सा एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। किसी भी गायनेकोलॉजिस्ट के लिए सबसे महत्वपूर्ण गुणों में से एक है मरीज की बात ध्यान से सुनने की क्षमता। महिलाएँ हमारे पास केवल शारीरिक समस्याएँ लेकर नहीं आतीं, बल्कि वे अपनी भावनात्मक परेशानियाँ और जीवन के बेहद निजी अनुभव भी साझा करती हैं। उन्हें ऐसे डॉक्टर की आवश्यकता होती है जिस पर वे पूरी तरह भरोसा कर सकें और बिना किसी झिझक के अपनी बात कह सकें। एक डॉक्टर को हमेशा विनम्र रहना चाहिए और निरंतर सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि चिकित्सा विज्ञान हर दिन आगे बढ़ रहा है। कोई भी डॉक्टर यह दावा नहीं कर सकता कि उसे सब कुछ पता है।
मरीज का विश्वास जीतना, ईमानदारी से संवाद करना और हर मरीज के साथ संवेदनशीलता से व्यवहार करना उतना ही आवश्यक है जितनी चिकित्सकीय विशेषज्ञता।
प्रश्न: आने वाले दस वर्षों में आप स्त्री एवं प्रसूति रोग विज्ञान का भविष्य किस दिशा में जाता हुआ देखती हैं?
उत्तर: मेरा मानना है कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में तकनीक और अधिक उन्नत होगी। रोबोटिक सर्जरी अधिक सुलभ होगी और गायनेकोलॉजी में इसका उपयोग व्यापक स्तर पर बढ़ेगा। साथ ही, लैप्रोस्कोपिक तकनीकें भी लगातार और बेहतर होती जाएँगी।
एक और महत्वपूर्ण बदलाव दर्दरहित प्रसव (Painless Labour) की सुविधा का अधिक व्यापक रूप से उपलब्ध होना होगा। इससे महिलाएँ माँ और शिशु दोनों की सुरक्षा बनाए रखते हुए कम दर्द के साथ प्रसव का अनुभव कर सकेंगी।
कुल मिलाकर महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य अत्यंत आशाजनक दिखाई देता है, जहाँ बेहतर तकनीक, अधिक आरामदायक उपचार और प्रत्येक मरीज के लिए व्यक्तिगत उपचार पद्धतियाँ उपलब्ध होंगी।
प्रश्न: गायनेकोलॉजी के क्षेत्र में हाल के कौन–से शोध आपको सबसे अधिक उत्साहित करते हैं?
उत्तर: महिलाओं का स्वास्थ्य एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ पूरी दुनिया में लगातार नए शोध किए जा रहे हैं। हाल के वर्षों में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि PCOS को अब केवल अंडाशय की बीमारी मानने के बजाय PMOS के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इसमें मेटाबॉलिक गड़बड़ियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
इसके अलावा शोधकर्ता उपचार पद्धतियों, प्रजनन चिकित्सा, मिनिमली इनवेसिव सर्जरी और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर लगातार काम कर रहे हैं। इन प्रतियों की मदद से डॉक्टर विभिन्न आयु वर्ग की महिलाओं को अधिक व्यक्तिगत और प्रभावी उपचार प्रदान कर पा रहे हैं।
प्रश्न: महिलाओं के अच्छे स्वास्थ्य के लिए आप कौन–कौन से निवारक उपाय अपनाने की सलाह देंगी?
उत्तर: रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होती है। अच्छे स्वास्थ्य की शुरुआत संतुलित आहार से होती है, जिसमें पर्याप्त मात्रा में फल, हरी सब्जियाँ, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल हों। नियमित शारीरिक गतिविधि भी उतनी ही महत्वपूर्ण है और इसे जीवनशैली का स्थायी हिस्सा बनाया जाना चाहिए। पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद हार्मोनल संतुलन, रोगप्रतिरोधकक्षमताऔरसंपूर्णस्वास्थ्यकेलिएबेहदआवश्यकहै।तनावकोनियंत्रितकरनाभीमहिलाओंकेस्वास्थ्यकाएकमहत्वपूर्णपहलूहै।
महिलाओं को अपनी भावनाओं को परिवार, दोस्तों या स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ साझा करने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए। मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक–दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं और दोनों को समान महत्व दिया जाना चाहिए।
प्रश्न: आज के स्वास्थ्य सेवा वातावरण में आप डॉक्टर और मरीज के रिश्ते को किस प्रकार देखती हैं?
उत्तर: अक्सर लोग डॉक्टरों को भगवान का दर्जा देते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि हम भी इंसान हैं और अपने ज्ञान तथा अनुभव के आधार पर मरीजों को सर्वोत्तम उपचार देने का प्रयास करते हैं। मेडिको–लीगल जागरूकता बढ़ने से जवाबदेही अवश्य बढ़ी है, जो एक सकारात्मक बदलाव है। हालाँकि, इसका असर डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास पर भी पड़ा है। हर सर्जरी में कुछ जोखिम और संभावित जटिलताएँ होती हैं, भले ही सभी निर्धारित चिकित्सा दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया हो। ऐसी परिस्थितियों को हर बार लापरवाही नहीं माना जाना चाहिए।
एक और चुनौती इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी की अधिकता है। आज मरीज पहले की तुलना में अधिक जागरूक हैं, लेकिन इंटरनेट पर उपलब्ध सामान्य जानकारी किसी अनुभवी डॉक्टर के व्यक्तिगत चिकित्सकीय मूल्यांकन का विकल्प नहीं हो सकती। हर व्यक्ति अलग होता है और प्रत्येक मरीज को उसकी स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत निदान और उपचार की आवश्यकता होती है।
प्रश्न: आज उपलब्ध विभिन्न गर्भनिरोधक उपायों को लेकर आपके क्या विचार हैं?
उत्तर: आधुनिक चिकित्सा में कई सुरक्षित और प्रभावी गर्भनिरोधक विकल्प उपलब्ध हैं। कोई एक तरीका सभी महिलाओं के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता। गर्भनिरोधक का चुनाव महिला की आयु, स्वास्थ्य स्थिति, भविष्य में परिवार बढ़ाने की योजना, जीवनशैली और व्यक्तिगत पसंद जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
प्रश्न: महिलाओं के स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की भूमिका और सहयोग को आप किस प्रकार देखती हैं?
उत्तर: सरकार की विभिन्न योजनाओं ने मातृ एवं स्त्री स्वास्थ्य सेवाओं तक महिलाओं की पहुँच को काफी बेहतर बनाया है। RGHS और CGHS जैसी योजनाओं ने कई उपचारों को आर्थिक रूप से अधिक सुलभ बनाया है।
इसके अलावा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं ने विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार किया है।
प्रश्न: अंत में, गायनेकोलॉजिस्ट बनने का सपना देखने वाले युवा डॉक्टरों को आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
उत्तर: स्त्री एवं प्रसूति रोग विज्ञान चिकित्सा की सबसे संतोषजनक विशेषज्ञताओं में से एक है, लेकिन यह उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है। इस क्षेत्र में समर्पण, कड़ी मेहनत और दिन–रात किसी भी समय आपात स्थिति के लिए तैयार रहने की आवश्यकता होती है।
हर नवजात शिशु, जिसे आप सुरक्षित रूप से इस दुनिया में लाने में मदद करते हैं, आपको यह एहसास दिलाता है कि यह पेशा चिकित्सा जगत के सबसे संतोषजनक करियरों में से एक क्यों माना जाता है।
चिकित्सकीय ज्ञान के साथ–साथ इस पेशे में धैर्य, संवेदनशीलता और भावनात्मक दृढ़ता भी आवश्यक है। महिलाएँ अपने गायनेकोलॉजिस्ट पर गहरा विश्वास करती हैं और गर्भावस्था, प्रसव से लेकर स्वास्थ्य से जुड़ी कई निजी और जटिल समस्याएँ उनके साथ साझा करती हैं। उनकी इस महत्वपूर्ण जीवन–यात्रा में उनका मार्गदर्शन करना केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक विशेष सम्मान और सौभाग्य भी है।

