विश्लेषकों के अनुसार, सरकार द्वारा कर्ज निवेश पर कर व्यवस्था में किए गए सुधारों से भारत में कर्ज आधारित निवेश विदेशी निवेशकों के लिए पहले की तुलना में अधिक आकर्षक बन गया है। इसके साथ ही रुपये की स्थिरता ने भी विदेशी निवेशकों का विश्वास मजबूत किया है।
10 जुलाई तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, द्वितीयक बाजार के माध्यम से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने कुल .₹5,155 करोड़ का निवेश किया है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार के अनुसार, द्वितीयक बाजार के अलावा “प्राथमिक बाजार एवं अन्य” श्रेणी के माध्यम से भी .₹10,001 करोड़ का निवेश प्राप्त हुआ है। इस प्रकार जुलाई में अब तक कुल विदेशी निवेश .₹15,156 करोड़ तक पहुंच चुका है, जिसे भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के महीनों में भारत में आने वाले विदेशी निवेश का सबसे महत्वपूर्ण रुझान कर्ज आधारित निवेश में लगातार बढ़ोतरी है। जुलाई में अब तक विदेशी निवेशकों ने सामान्य सीमा (जनरल लिमिट) के अंतर्गत .₹3,228 करोड़ तथा फुली एक्सेसिबल रूट (एफएआर) के माध्यम से .₹6,619 करोड़ का निवेश किया है। विश्लेषकों के अनुसार, भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिति, नियंत्रित महंगाई, बेहतर आर्थिक संकेतक और रुपये की स्थिरता ने विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। यही कारण है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत विदेशी निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
दूसरी ओर, चिप उद्योग में कमजोरी तथा दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली किए जाने से भी भारत की ओर निवेश का प्रवाह बढ़ा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक परिस्थितियां और अधिक गंभीर नहीं होती हैं, तो आने वाले समय में भी यह निवेश प्रवाह जारी रह सकता है। बीते सप्ताह भारतीय शेयर बाजार लगातार चार सप्ताह की बढ़त के बाद मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल ने निवेशकों की धारणा पर दबाव बनाया। पूरे सप्ताह बाजार की दिशा मुख्य रूप से भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से प्रभावित रही। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया, जब हालिया अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आईं।
रिलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (रिसर्च) अजीत मिश्रा के अनुसार, इस तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें कुछ समय के लिए .$80 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं। हालांकि सप्ताह के अंत तक कीमतें घटकर लगभग .$76 प्रति बैरल पर आ गईं, जिससे आयातित महंगाई और बाहरी क्षेत्र से जुड़े जोखिमों को लेकर कुछ राहत मिली। क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो पूरे सप्ताह अलग-अलग क्षेत्रों में मिश्रित रुख देखने को मिला। रियल एस्टेट क्षेत्र ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि सूचना प्रौद्योगिकी और धातु क्षेत्रों में भी चुनिंदा खरीदारी के कारण अच्छी बढ़त दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाला सप्ताह भारतीय बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेगा। इस दौरान जारी होने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़े, कंपनियों के तिमाही परिणाम तथा वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम निवेशकों की धारणा और बाजार की दिशा तय करेंगे।

