Monday, July 13, 2026 |
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ऑस्ट्रेलिया-भारत के बीच समझौतों से व्यापार और आर्थिक सहयोग में आएगी तेजी

भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा, AI, सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति

by Business Remedies
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मेलबर्न में पिछले दिनों भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री Anthony Albanese के बीच बातचीत में कई समझौतों पर सहमति बनी है। यह सहमति दोनों देशों के मध्य रक्षा सहयोग, AI, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स, ग्रीन हाइड्रोजन व स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने पर हुई है। Australia और भारत के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापार और आर्थिक सहयोग तेजी से बढ़ा है। इसका उद्देश्य व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना है। Australia ने भारत से आने वाले लगभग 96 फीसदी निर्यात पर शुल्क समाप्त कर दिया है, जो आगे चलकर लगभग 100 फीसदी तक पहुंचने का लक्ष्य रखता है। वहीं भारत ने भी Australia से आयात होने वाले कई उत्पादों पर शुल्क में कमी की है। इनमें सेवाओं, निवेश और पेशेवरों की आवाजाही को बढ़ावा देने के प्रावधान शामिल हैं।

व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते के तहत बढ़ेगा व्यापार

व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते के तहत दोनों देश अब व्यापक CECA पर बातचीत कर रहे हैं। इसमें अधिक वस्तुओं पर शुल्क में कटौती, डिजिटल व्यापार, निवेश सुरक्षा, ई-कॉमर्स, सरकारी खरीद और सेवाओं में व्यापक बाजार पहुंच शामिल है। इसके अलावा दोनों देशों ने व्यापार से जुड़े कई क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया है। इसमें महत्वपूर्ण खनिज जैसे लिथियम और कोबाल्ट, स्वच्छ ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन, शिक्षा और कौशल विकास, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा रक्षा उद्योग एवं आपूर्ति श्रृंखला सहयोग शामिल है।

इन समझौतों से भारत को आने वाले समय में वस्त्र, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, दवाइयां और कृषि उत्पादों के लिए Australia के बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे। वहीं निर्यात बढ़ने से विनिर्माण, कृषि और सेवा क्षेत्रों में नए रोजगार बनने की उम्मीद है। इसके अलावा Australia से कोयला, लिथियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिज अपेक्षाकृत कम लागत पर मिल सकते हैं, जिससे भारतीय उद्योगों, विशेषकर इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी निर्माण को लाभ होगा। ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के भारत में निवेश से बुनियादी ढांचे, खनन, शिक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों को प्रोत्साहन मिल सकता है। वहीं भारत, China पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत विकसित करने में सक्षम होगा। भारतीय छात्रों और कुशल पेशेवरों के लिए शिक्षा, शोध और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।



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