Saturday, September 12, 2026 |
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Defence भूमि पर उत्तर प्रदेश के सीतापुर में 250 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना को मंजूरी, रक्षा प्रतिष्ठानों को मिलेगा बड़ा लाभ

by Business Remedies
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Rajnath Singh Approves 250 MW Solar Power Project On Defence Land In Sitapur Uttar Pradesh

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर में लगभग 850 एकड़ खाली रक्षा भूमि पर 250 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के साथ बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली भी विकसित की जाएगी, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनाया जा सकेगा। यह पहल देश में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह अपनी तरह की पहली बड़ी परियोजना है, जिसमें रक्षा भूमि पर बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा उत्पादन संयंत्र और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली को एकीकृत रूप से विकसित किया जाएगा। इससे न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रक्षा प्रतिष्ठानों की ऊर्जा आवश्यकताओं को भी अधिक प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा। इस परियोजना को राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम लिमिटेड द्वारा प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य रक्षा प्रतिष्ठानों के लिए ऊर्जा की सबसे उपयुक्त और किफायती दर सुनिश्चित करना है, जिससे दीर्घकाल में सरकारी खर्च में उल्लेखनीय कमी लाई जा सके।

परियोजना के क्रियान्वयन में रक्षा मंत्रालय मुख्यालय (सेना) तथा रक्षा संपदा महानिदेशालय की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। सभी संबंधित संस्थाएं मिलकर परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए समन्वित रूप से कार्य करेंगी। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और पर्यावरणीय स्थिरता का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगी। इसके माध्यम से रक्षा क्षेत्र की उपलब्ध भूमि और संसाधनों का उपयोग राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए किया जाएगा, जबकि रणनीतिक हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित रहेगी।

परियोजना के पूर्ण होने के बाद सीतापुर सौर ऊर्जा परियोजना रक्षा भूमि पर स्थापित देश की सबसे महत्वपूर्ण नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल हो सकती है। साथ ही यह रक्षा क्षेत्र में भविष्य में विकसित होने वाली सौर ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के लिए एक मानक भी स्थापित करेगी। सरकार की यह पहल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने की नीति के अनुरूप है। इससे रक्षा बलों की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और पारंपरिक विद्युत आपूर्ति की खरीद पर होने वाला खर्च भी काफी हद तक कम होगा। परियोजना के पूरे जीवनकाल में इससे सरकारी खजाने को उल्लेखनीय वित्तीय बचत होने की संभावना जताई जा रही है।



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