New Delhi,
भारत में Ultra-Rich यानी अत्यधिक धनी लोगों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है और आने वाले समय में इसमें और तेजी आने की संभावना है। एक हालिया report के अनुसार, वर्ष 2031 तक इस वर्ग की आबादी में 27 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने का अनुमान है। global property consultancy Knight Frank द्वारा किए गए analysis के मुताबिक, वर्तमान में भारत में ultra-high-net-worth individuals (UHNWI) की संख्या 19,877 है, जो वर्ष 2031 तक बढ़कर 25,217 तक पहुंच सकती है। यह आंकड़े देश में तेजी से बढ़ती संपत्ति और निवेश क्षमता को दर्शाते हैं। report में बताया गया है कि भारत में अरबपतियों की संख्या में भी मजबूत वृद्धि हुई है। पिछले पांच वर्षों में यह संख्या 58 प्रतिशत बढ़कर वर्ष 2026 में 207 हो गई है। इस मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है, जहां इससे आगे केवल United States और China हैं। आगे आने वाले वर्षों में भी यह वृद्धि जारी रहने की संभावना है। अनुमान है कि वर्ष 2031 तक अरबपतियों की संख्या 51 प्रतिशत बढ़कर 313 तक पहुंच सकती है। इससे global स्तर पर भारत की हिस्सेदारी 6.7 प्रतिशत से बढ़कर करीब 8 प्रतिशत तक हो सकती है।
वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भागीदारी
वर्ष 2026 में global UHNWI आबादी में भारत की हिस्सेदारी 2.8 प्रतिशत रही, जो पांच साल पहले लगभग 2 प्रतिशत के आसपास थी। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि वैश्विक wealth distribution में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। इस समय ultra-rich आबादी के मामले में भारत दुनिया में छठे स्थान पर पहुंच चुका है। report के अनुसार, भारत में wealth अब केवल एक या दो शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार कई क्षेत्रों में हो रहा है। हालांकि, मुंबई अब भी देश के ultra-rich लोगों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां कुल आबादी का 35.4 प्रतिशत हिस्सा निवास करता है। दिल्ली की हिस्सेदारी बढ़कर 22.8 प्रतिशत हो गई है। वहीं, चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों में भी पिछले दशक में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। दूसरी ओर, बेंगलुरु में हिस्सेदारी में हल्की गिरावट देखी गई है।
आर्थिक बदलाव का संकेत
Knight Frank India के Chairman और Managing Director शिशिर बैजल ने कहा कि भारत में wealth base का विस्तार देश की बदलती आर्थिक संरचना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत अब एक अधिक उद्यमशील और वित्तीय रूप से परिपक्व अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार, डिजिटलाइजेशन, listed equities, private capital और पारिवारिक व्यवसाय इस निरंतर wealth creation के प्रमुख कारक हैं।
वैश्विक स्तर पर भी बढ़ रही संपत्ति
report में यह भी बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर भी Ultra-Rich आबादी में तेजी से वृद्धि हुई है, जबकि geopolitical uncertainties, उच्च ब्याज दरें और असमान आर्थिक विकास जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके बावजूद private capital की मजबूती इस वृद्धि को बनाए हुए है। Knight Frank के Global Head of Research लियाम बेली ने कहा कि वैश्विक wealth distribution में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां भारत जैसे उभरते देश अब पारंपरिक आर्थिक शक्तियों के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।




