जयपुर |बीआर न्यूज नेटवर्क | नीति आयोग की ‘ट्रेड वॉच क्वार्टरली’ रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) में भारत का व्यापार प्रदर्शन मिला-जुला लेकिन मजबूत रहा। मर्चेंडाइज निर्यात में सीमित वृद्धि के बावजूद सेवाओं के निर्यात में अच्छी बढ़त और अधिशेष ने बाहरी संतुलन को सहारा दिया। रिपोर्ट नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी द्वारा जारी की गई, जिसमें जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।
ट्रेड परफॉर्मेंस का रुझान
रिपोर्ट के अनुसार, तीसरी तिमाही में माल निर्यात 1.6 प्रतिशत बढ़ा, जबकि आयात 7.9 प्रतिशत बढ़ा। इससे व्यापार का रुख मिला-जुला रहा, लेकिन कुल मिलाकर प्रदर्शन मजबूत माना गया।
सेवाओं का योगदान
इस अवधि में सेवाओं का निर्यात 7.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सेवाओं का आयात अपेक्षाकृत कम रहा। इसके चलते लगातार अधिशेष बना रहा, जिसने भारत के बाहरी संतुलन को मजबूती दी।
जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर की भूमिका
रिपोर्ट में इस श्रम-आधारित मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को प्रमुखता दी गई है। कच्चे सोने को छोडक़र वैश्विक बाजार 378 अरब डॉलर का है, जिसमें भारत का निर्यात 29.5 अरब डॉलर रहा, जो वैश्विक हिस्सेदारी का 7.8 प्रतिशत है।
भारत की वैश्विक ताकत और प्रोसेसिंग हब
हीरे और कीमती धातुओं के आभूषणों में भारत की मजबूत पकड़ है, जो वैश्विक मांग के बड़े हिस्से को पूरा करते हैं। लगभग 26.7 अरब डॉलर का निर्यात इन क्षेत्रों से हुआ। सूरत दुनिया का सबसे बड़ा डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग केंद्र बनकर उभरा है, जिससे भारत एक प्रमुख वैल्यू एडिशन और प्रोसेसिंग हब के रूप में स्थापित हुआ है।
चुनौतियां और सुझाव
नीति आयोग ने सेक्टर में कई चुनौतियां बताई हैं, जिनमें एमएसएमई का बिखरा ढांचा, आयातित कच्चे माल पर निर्भरता, फाइनेंस की कमी, स्किल और डिजाइन की समस्याएं शामिल हैं। साथ ही, निर्यात कुछ चुनिंदा बाजारों (अमेरिका, यूएई, हांगकांग) पर निर्भर है। रिपोर्ट में लैब-ग्रोन डायमंड, टेक्नोलॉजी, स्किल डेवलपमेंट, फाइनेंस की उपलब्धता और मजबूत नीतिगत ढांचे पर जोर देने की सिफारिश की गई है।

