Tuesday, June 30, 2026 |
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भारत के रक्षा निर्यात में ऐतिहासिक उछाल

38,424 करोड़ रुपए तक पहुंचा कुल निर्यात

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली। भारत ने रक्षा निर्यात के क्षेत्र में वित्त वर्ष 2025-26 में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, निर्यात में 62 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो देश को वैश्विक रक्षा बाजार में तेजी से मजबूत बना रही है। यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया’और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी नई गति देती है। साथ ही, रक्षा उत्पादन में बढ़ती गुणवत्ता और तकनीकी दक्षता ने भारतीय उत्पादों की वैश्विक मांग को और मजबूती दी है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रक्षा निर्यात
भारत के रक्षा निर्यात ने वित्त वर्ष 2025-26 में ऐतिहासिक उछाल दर्ज करते हुए 38,424 करोड़ रुपए का आंकड़ा छू लिया है। यह पिछले वर्ष के 23,622 करोड़ रुपए की तुलना में 62.66 प्रतिशत अधिक है। इस तेजी के पीछे सरकार की नीतिगत सुधार, लाइसेंसिंग प्रक्रिया में सरलता और निर्यात को बढ़ावा देने वाले कदम अहम रहे हैं। इससे भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का बेहतर अवसर मिला है। इसके अलावा, रक्षा उत्पादन में निजी निवेश भी तेजी से बढ़ा है, जिससे नई तकनीकों का विकास संभव हुआ है।

डीपीएसयू और निजी क्षेत्र की अहम भूमिका
इस उपलब्धि में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (डीपीएसयू) और निजी कंपनियों दोनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कुल निर्यात में डीपीएसयू की हिस्सेदारी 54.84 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र का योगदान 45.16 प्रतिशत रहा। डीपीएसयू के निर्यात में 151 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज हुई, वहीं निजी क्षेत्र ने भी 14 प्रतिशत की बढ़त हासिल की। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों क्षेत्रों के बीच तालमेल लगातार मजबूत हो रहा है और उत्पादन क्षमता में भी सुधार आया है। साथ ही, स्टार्टअप और एमएसएमई सेक्टर की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है।

वैश्विक बाजार में भारत की मजबूत पकड़
भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है, जो इसकी वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। निर्यातकों की संख्या भी बढक़र 145 हो गई है। इसके अलावा, भारत अब केवल उपकरण ही नहीं बल्कि तकनीकी समाधान और मेंटेनेंस सेवाएं भी उपलब्ध करा रहा है। यह संकेत है कि भारतीय रक्षा उत्पाद अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में तेजी से अपनी मजबूत जगह बना रहे हैं और देश वैश्विक रक्षा निर्माण हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में और तेज वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।



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