Sunday, June 28, 2026 |
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भारत के विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार मार्च में धीमी, रोजगार वृद्धि बनी मजबूत

by Business Remedies
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Outlook on Production and Employment Growth in India's Manufacturing Sector

New Delhi,

भारत के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में मार्च महीने के दौरान हल्की नरमी दर्ज की गई। एचएसबीसी द्वारा जारी नवीनतम पीएमआई आंकड़ों के अनुसार, मार्च में विनिर्माण पीएमआई घटकर 53.9 पर आ गया, जो यह संकेत देता है कि वैश्विक स्तर पर उत्पन्न बाधाओं का असर अब घरेलू उद्योगों पर भी दिखने लगा है। रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा प्रभाव भारत के विनिर्माण क्षेत्र पर पड़ा है। इससे उत्पादन और नए ऑर्डर की गति में कमी आई है, जिससे मांग में नरमी और अनिश्चितता बढ़ी है। मार्च के दौरान कच्चे माल की लागत में तेज बढ़ोतरी देखी गई, जो अगस्त 2022 के बाद सबसे अधिक रही। एल्युमिनियम, रसायन, ईंधन, जूट, चमड़ा, कपड़ा, तेल, रबर और इस्पात जैसे कई प्रमुख सामग्रियों की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, कंपनियों ने इस बढ़ी हुई लागत का अधिकांश हिस्सा स्वयं वहन किया। उपभोक्ताओं पर इसका असर सीमित रहा, क्योंकि उत्पादों की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी ही की गई, जो पिछले दो वर्षों में सबसे कम रही है।

भंडारण बढ़ाने से रोजगार और खरीद में मजबूती

रिपोर्ट में बताया गया कि कंपनियों ने भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए अतिरिक्त कच्चा माल जमा करना शुरू किया। इससे उत्पादन के लिए सामग्री की खरीद में वृद्धि हुई और रोजगार के अवसर भी बढ़े। रोजगार के मोर्चे पर सकारात्मक संकेत मिले हैं, जहां कंपनियों ने पिछले सात महीनों में सबसे तेज गति से नई नियुक्तियां की हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि उद्योग क्षेत्र में भरोसा अभी भी बना हुआ है। हालांकि कुल वृद्धि दर तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई, फिर भी यह ऐतिहासिक रूप से मजबूत बनी हुई है। कंपनियों ने बिक्री में वृद्धि और संचालन को सुचारू बनाए रखने के प्रयासों को इस स्थिति का प्रमुख कारण बताया है।

निर्यात मांग में सुधार, वैश्विक बाजारों से मिला सहारा

भारतीय विनिर्माताओं को बाहरी बाजारों से भी मजबूत समर्थन मिला है। ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, यूरोप, जापान, मध्य पूर्व, तुर्की और वियतनाम जैसे देशों से मांग में वृद्धि दर्ज की गई है। यह सितंबर के बाद निर्यात में सबसे मजबूत विस्तार माना जा रहा है। आपूर्तिकर्ताओं का प्रदर्शन भी बेहतर रहा है और उन्होंने समय पर सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित की है। इससे उत्पादन प्रक्रिया में बाधाएं कम हुई हैं और उद्योगों को सुचारू रूप से कार्य करने में मदद मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां आने वाले वर्ष को लेकर आशावादी बनी हुई हैं। उत्पादन में वृद्धि और मांग में सुधार की उम्मीद के साथ उद्योग क्षेत्र आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है।



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