नई दिल्ली,
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत वर्ष 2026 में वैश्विक वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि में लगभग 17 प्रतिशत योगदान देने वाला प्रमुख देश बन सकता है। आईएमएफ का मानना है कि भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है और आने वाले वर्षों में भी इसका प्रभाव वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर मजबूत रहेगा। आईएमएफ द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों के अनुसार वैश्विक जीडीपी वृद्धि में योगदान देने वाले देशों की सूची में भारत पहले स्थान पर है। इसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका का योगदान लगभग 9.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं इंडोनेशिया का योगदान 3.8 प्रतिशत, तुर्किये का 2.2 प्रतिशत और सऊदी अरब का 1.7 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा वियतनाम से 1.6 प्रतिशत योगदान का अनुमान है, जबकि नाइजीरिया और ब्राजील दोनों से लगभग 1.5 प्रतिशत-1.5 प्रतिशत योगदान की उम्मीद की गई है। इस सूची में जर्मनी दसवें स्थान पर है और उससे वैश्विक जीडीपी वृद्धि में लगभग 0.9 प्रतिशत योगदान का अनुमान जताया गया है। आईएमएफ के अनुसार यूरोप के अन्य देश इस शीर्ष दस सूची में शामिल नहीं हैं।
भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाया
आईएमएफ ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। संस्था ने वर्ष 2025 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 0.7 प्रतिशत बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। यह संशोधन भारत की मजबूत आर्थिक गतिविधियों और वित्त वर्ष के अंतिम चरण में दिखी तेज गति के कारण किया गया है। विश्व आर्थिक परिदृश्य से जुड़े अपने अद्यतन आकलन में आईएमएफ ने कहा कि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रहे वर्तमान वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में मजबूत गति देखने को मिली है, जिससे भारत की वृद्धि दर के अनुमान को ऊपर संशोधित किया गया है।
अगले वित्त वर्ष में भी मजबूत रहेगी वृद्धि
आईएमएफ के अनुसार अगले वित्त वर्ष 2026-2027 में भारत की आर्थिक वृद्धि लगभग 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि यह मौजूदा वर्ष की तुलना में कुछ कम होगी, लेकिन इसके बावजूद भारत उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि का प्रमुख चालक बना रहेगा। संस्था का मानना है कि भारत की घरेलू मांग, निवेश गतिविधियां और बुनियादी ढांचा विकास आने वाले समय में आर्थिक विस्तार को मजबूती देंगे। आईएमएफ ने अनुमान लगाया है कि वर्ष 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि लगभग 3.3 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर रह सकती है। इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय व्यापार तनाव में कमी, अनुकूल वित्तीय परिस्थितियां और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बढ़ते निवेश को मुख्य कारण बताया गया है। विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी तकनीकों में तेजी से हो रहा निवेश वैश्विक आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे रहा है, जिससे कई देशों में उत्पादकता और निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
महंगाई में कमी से घरेलू मांग को मिलेगा सहारा
आईएमएफ के अनुसार वर्ष 2025 के दौरान खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी के कारण भारत में महंगाई दर में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। इससे महंगाई केंद्रीय बैंक के लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है और घरेलू मांग को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है। हालांकि संस्था ने यह भी चेतावनी दी है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी उत्पादकता में तेजी के कारण वैश्विक निवेश के रुझान में बदलाव आ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय परिस्थितियां सख्त हो सकती हैं और इसका असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है।

