मुंबई,
गुरुवार को भारतीय share बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद Sensex लगभग 1000 अंक लुढ़क गया, जबकि Nifty फिसलकर 24,500 के नीचे बंद हुआ। बाजार पर मुख्य रूप से वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में कमजोरी का दबाव रहा, हालांकि रक्षा क्षेत्र के शेयरों में मजबूत तेजी देखने को मिली। दिन के अंत में Sensex में तेज गिरावट दर्ज की गई और बाजार का रुख नकारात्मक रहा। वहीं Nifty भी गिरावट के साथ बंद हुआ, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर दिखाई दी। कारोबार के दौरान कई प्रमुख बैंक और वित्तीय कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखी गई, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया। वृहद कंपनियों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयर अपेक्षाकृत शांत रहे। Nifty Midcap सूचकांक लगभग 0.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं Nifty Smallcap सूचकांक मामूली बढ़त के साथ दिन समाप्त करने में सफल रहा। इससे संकेत मिलता है कि छोटे निवेशकों की ओर से सीमित खरीदारी जारी रही।
इन कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट
Nifty में शामिल कंपनियों में आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल, श्रीराम फाइनेंस, एचडीएफसी लाइफ और कोल इंडिया के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कंपनियों में बिकवाली के कारण पूरे बाजार पर दबाव देखने को मिला। दूसरी ओर कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में अच्छी बढ़त भी देखने को मिली। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज़, एनटीपीसी, ओएनजीसी और सन फार्मा के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। खासकर रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की मजबूत खरीदारी देखी गई।
क्षेत्रवार सूचकांकों का प्रदर्शन मिला-जुला
क्षेत्रीय सूचकांकों की बात करें तो कई क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई। वाहन, रियल एस्टेट, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और निजी बैंक से जुड़े सूचकांक लगभग 0.5 से 1 प्रतिशत तक गिर गए। वहीं दूसरी ओर रक्षा क्षेत्र का सूचकांक करीब 3 प्रतिशत उछल गया, जो दिन का सबसे मजबूत प्रदर्शन रहा। इसके अलावा ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी और तेल-गैस क्षेत्र के सूचकांकों में भी लगभग 0.3 से 0.6 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय क्षेत्र में कमजोरी के कारण बाजार पर दबाव बना रहा, लेकिन रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत खरीदारी ने कुछ हद तक गिरावट को संतुलित करने का प्रयास किया। आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेतों और संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की दिशा काफी हद तक निर्भर रह सकती है।




