नई दिल्ली,
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जर्मनी की अपनी यात्रा के दौरान वहां के शीर्ष नेताओं और उद्योगपतियों से मुलाकात कर भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर विस्तृत चर्चा की। वित्त मंत्रालय के अनुसार इस दौरान द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को और मजबूत करने तथा विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और कृषि जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। वित्त मंत्री ने जर्मनी के उप-चांसलर और संघीय वित्त मंत्री लार्स क्लिंगबील से भेंट की। इस दौरान जनवरी में भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के संघीय चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच हुई बैठक का उल्लेख किया गया, जिससे रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती मिली थी। मर्ज 12 से 13 जनवरी तक आधिकारिक यात्रा पर भारत आए थे और उनके साथ 23 प्रमुख जर्मन मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी था।
बैठक में लार्स क्लिंगबील ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को व्यापार और निवेश के लिए बड़ा कदम बताया। उन्होंने द्विपक्षीय विकास सहयोग तथा भारत में मेट्रो रेल विस्तार परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया। वित्त मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार दोनों पक्षों ने औद्योगिक सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति जताई। निर्मला सीतारमण ने जर्मन पक्ष को भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली की सफलता के बारे में अवगत कराया और भारत की डिजिटल संरचना से जुड़ी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
म्यूनिख में वित्त मंत्री ने लिकटेंस्टाइन की प्रधानमंत्री ब्रिगिट हास और युवराज एलोइस फिलिप मारिया से भी मुलाकात की। इस दौरान लिकटेंस्टाइन स्थित कंपनियों द्वारा भारत में किए जा रहे निवेश की समीक्षा की गई और विनिर्माण, पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकी, कृषि उपकरण तथा जलवायु परिवर्तन से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाने पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने यूरोपीय केंद्रीय बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लागार्ड से भी भेंट की। दोनों पक्षों ने जनवरी 2026 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की दिशा में प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। सीतारमण ने कहा कि इस समझौते के तहत व्यापार को सुगम बनाने में यूरोपीय केंद्रीय बैंक की वित्तीय भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार के वर्ष 2025-26 और 2026-27 के बजट प्रावधानों के तहत भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के ढांचे में यूरोपीय संघ के बैंकों को चार वर्षों में अधिकतम 15 शाखाएं खोलने की अनुमति दी जाएगी। इससे वित्तीय सहयोग और निवेश प्रवाह को बढ़ावा मिलने की संभावना है। इससे पहले वित्त मंत्री ने बीएमडब्ल्यू एजी के प्रबंधन बोर्ड के अध्यक्ष ओलिवर जिप्से से भी मुलाकात की। बैठक में हाल के सुधारों के आलोक में भारत की अर्थव्यवस्था के खुलते स्वरूप, नीतिगत निरंतरता और स्थिरता पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने माना कि दीर्घकालिक निवेश के लिए स्थिर नीति वातावरण अत्यंत आवश्यक है।

