नई दिल्ली,
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के 10 वर्षों के दौरान केवल 6 लाख मीट्रिक टन दालों की खरीद की गई थी, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अब तक 1 करोड़ 92 लाख मीट्रिक टन दालों की रिकॉर्ड खरीद की है। उन्होंने कहा कि यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ है। मंत्री ने घोषणा की कि अरहर, मसूर और उड़द की 100 प्रतिशत खरीद सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसान जितनी भी मात्रा में उत्पादन करेंगे और बेचना चाहेंगे, केंद्र सरकार उसे पूरी तरह खरीदेगी। इससे किसानों को बाजार की अनिश्चितता से राहत मिलेगी और उन्हें उचित मूल्य प्राप्त होगा।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत के पास विश्व में दालों की खेती का 38 प्रतिशत क्षेत्र है, लेकिन उत्पादन में हिस्सेदारी केवल 28 प्रतिशत है। इसका मुख्य कारण पुराने बीज, कम बीज प्रतिस्थापन दर और प्रतिकूल मौसम की स्थिति रही है। इन कारणों से कई किसानों ने अन्य फसलों की ओर रुख कर लिया था। वर्ष 2016 तक भारत दालों का सबसे बड़ा आयातक देश था। उन्होंने संसद को जानकारी दी कि उन्नत तकनीक, बेहतर किस्मों, वैज्ञानिक अनुसंधान, किसानों को सहयोग और नीतिगत समर्थन के माध्यम से दाल क्रांति की शुरुआत हुई। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2021-22 में दालों का उत्पादन रिकॉर्ड 27.30 मिलियन टन तक पहुंच गया।
दालों में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत उन्नत बीज किस्मों का विकास, अधिक बीज प्रतिस्थापन दर, किसानों का प्रशिक्षण, समूह आधारित खेती, निःशुल्क मिनी किट वितरण, प्रदर्शन प्लॉट, प्रति हेक्टेयर 10 हजार रुपए तक की सहायता, पारदर्शी खरीद व्यवस्था और दाल मिल स्थापित करने के लिए 25 लाख रुपए तक की सहायता का प्रावधान किया गया है। राज्यसभा में मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि अवसंरचना को मजबूत करने के लिए कृषि अवसंरचना कोष के अंतर्गत 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक की व्यवस्था की। इसका उद्देश्य किसानों की उपज को सुरक्षित भंडारण की सुविधा प्रदान करना है।
इस योजना के तहत 44,243 कस्टम हायरिंग केंद्र, 25,854 प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र, 25,565 कृषि कटाई स्वचालन इकाइयां, 17,779 गोदाम, 4,201 छंटाई एवं ग्रेडिंग इकाइयां, 3,549 स्थानों पर स्मार्ट और सटीक कृषि ढांचा तथा 2,827 कोल्ड स्टोरेज स्थापित किए गए हैं। इन आधुनिक संरचनाओं के कारण फसलों, फलों और सब्जियों की हानि में 5 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक की कमी आई है। मंत्री ने कहा कि अब किसान अपनी उपज को सुरक्षित रखकर बेहतर मूल्य प्राप्त कर पा रहे हैं और उन्हें कटाई के तुरंत बाद मजबूरी में बिक्री नहीं करनी पड़ रही है।

