विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों को बढ़ावा देने, उनके प्रति जागरूकता बढ़ाने, समान अवसर प्रदान करने और विकास में मदद करने के लिए आज अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस मनाया जाएगा। यह दिवस दिव्यांगजनों के समावेश, सुगम्यता और सशक्तिकरण पर फोकस डालता है। इस वर्ष दिवस की थीम, महत्व, अधिकारों, सरकारी योजनाओं, कानूनी प्रावधानों और भारत में दिव्यांगजनों के सामने आने वाली चुनौतियों पर विचार करना है। अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस की शुरुआत वर्ष, 1992 में हुई थी, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसे घोषित किया था। यह दिन विकलांग व्यक्तियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उनके अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। विकलांग व्यक्ति वे व्यक्ति होते हैं, जिनमें दीर्घकालिक शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या संवेदी विकलांगता होती है, जो समाज में समान स्तर पर भाग लेने की उनकी क्षमता को सीमित करती है। वर्ष, 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 26.8 मिलियन विकलांग व्यक्ति हैं, जो कुल जनसंख्या का 2.21 फीसदी है। इनमें से 14.9 मिलियन पुरुष, 11.9 मिलियन महिलाएं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विकलांग जनसंख्या का 69 फीसदी हिस्सा है। विकलांगता का सर्वाधिक प्रसार 10-19 आयु वर्ग में देखा गया है। पहले साल से ही इसका उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों और कल्याण को बढ़ावा देना रहा है। धीरे-धीरे, विभिन्न संगठन और सरकारें इस प्रयास में शामिल होते गए। समय के साथ इस दिवस का ध्यान शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक जीवन के सभी पहलुओं में विकलांग व्यक्तियों के समावेश और सशक्तिकरण पर केंद्रित हो गया है।

