बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली (आईएएनएस)। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रविवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल बदलाव के इस दौर में भारत को अपनी स्वदेशी तकनीकी क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘चौथे कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन’ में भारतीय उद्योग जगत से अपील की कि वे नकल करने के बजाय ‘आत्मनिर्भर नवाचार’ को प्राथमिकता दें।सिंधिया ने कहा, “एआई को उपभोग की वस्तु नहीं बल्कि एक स्वदेशी क्षमता के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इसे भारतीय भाषाओं और भारतीय जरूरतों के लिए तैयार करना होगा, न कि केवल आयातित उत्पाद की तरह अपनाना।” उन्होंने ‘भाषिणी ऐप’ का उदाहरण देते हुए कहा कि यह वास्तविक समय में अनुवाद की सुविधा देकर नागरिकों को सशक्तबना रहा है।
सिंधिया ने बताया कि सेमीकंडक्टर, दूरसंचार और डिजिटल फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में भारत लगातार मजबूती हासिल कर रहा है। कोविड-19 महामारी ने दुनिया को यह सिखाया कि एक छोटे से चिप पर अरबों डॉलर की कंपनियों का भविष्य टिका होता है। उन्होंने सेमीकंडक्टर को “मानव प्रगति की नींव” बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया। यह कदम आचार्य चाणक्य की उस शिक्षा से प्रेरित है, जिसमें किसी भी कार्य से पहले यह समझने की सलाह दी गई है कि क्यों, क्या और कैसे।
सिंधिया ने कहा, “कोविड महामारी ने हमें सिखाया कि अरबों डॉलर की कंपनियों का भाग्य एक छोटे चिप पर निर्भर है। भारत ने निराशा नहीं बल्कि निर्णय का रास्ता चुना।” मंत्री ने ‘भारत सेमीकंडक्टर मिशन’ का भी उल्लेख किया, जिसके तहत 76,000 करोड़ रुपये के निवेश से विभिन्न राज्यों में फैब यूनिट्स लगाई जा रही हैं और 85,000 युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस क्षेत्र में निवेश पहले ही 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जिससे भारत आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार अर्थव्यवस्था बन रहा है। सिंधिया ने कहा कि भारत आज ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए एक आधारस्तंभ, न्याय और समानता की आवाज़ तथा विभाजित भू-राजनीतिक खेमों के बीच सेतु बनकर उभरा है।

