विमानों में यात्रा करना दिनोंदिन जोखिमभरा होता जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से विमानों में उड़ान के समय खराबियां आना तो आम बात होती जा रही है। वहीं गत दिनों ही जो हैरत करनी वाली घटना घटी है, वह विमानन कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर करती है। अफगानिस्तान का तेरह वर्ष का बच्चा विमान के लैंडिंग गियर में छिपकर भारत पहुंच गया। जब एयरलाइन के सुरक्षा कर्मियों ने बच्चे को विमान के पास घूमते देखा तब पता चला कि बच्चा अफगानिस्तान के कुंदुज का निवासी है। जो बिना टिकट विमान के लैंडिंग गियर के हिस्से में छिपकर आ गया। अब सवाल यह उठता है कि बच्चे के कारण विमान हादसाग्रस्त हो जाता है या फिर बच्चे की मौत हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी किससे माथे आती? वैसे तो विमान यात्रा को बसों तथा रेलगाडिय़ों की तुलना में अधिक सुरक्षित माना जाता है परन्तु पिछले कुछ अरसे से विमानों में उड़ान के दौरान खराबियां और विमान यात्राओं में सुरक्षा पर प्रश्न उठने लगे हैं। इसी वर्ष 12 जून की एयर इंडिया विमान दुर्घटना इसका जीता जागता उदाहरण है, जिसमें 260 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। उसके बाद भी विमानन कंपनियां नहीं चेती हैं। ऐसे में विमान यात्राओं में सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। ऐसे में विमानन कम्पनियों की ओर से उड़ान से पहले विमानों की अचूक तकनीकी जांच और सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से निरीक्षण सुनिश्चित करने की जरूरत है ताकि विमान यात्रा बिना किसी जोखिम के सुरक्षित बनी रहे।

