Wednesday, May 20, 2026 |
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उत्तर प्रदेश में बासमती ऑर्गेनिक प्रशिक्षण केंद्र के लिए 70 वर्ष की लीज़ तय, किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

by Business Remedies
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Basmati Organic Farming Training Centre In Uttar Pradesh

New Delhi,

केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के टांडा बिजैसी क्षेत्र में बासमती और ऑर्गेनिक खेती के लिए प्रशिक्षण केंद्र-सह-डेमो फार्म स्थापित करने हेतु लगभग सात एकड़ भूमि के लिए 70 वर्ष की लीज़ को अंतिम रूप दे दिया है। यह पहल किसानों की क्षमता बढ़ाने और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है।

सरकारी बयान के अनुसार इस केंद्र में ऑडिटोरियम, म्यूजियम, बासमती और ऑर्गेनिक खेती पर गैलरी, कॉन्फ्रेंस कक्ष, प्रयोगशाला और ऑर्गेनिक खेती से जुड़े इनपुट के लिए भंडारण सुविधा जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। यह केंद्र किसानों, कृषि विशेषज्ञों और विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन केंद्र के रूप में कार्य करेगा। यह देश का पहला ऐसा केंद्र होगा जहां पारंपरिक और ऑर्गेनिक दोनों प्रकार की बासमती खेती का प्रशिक्षण और प्रदर्शन एक ही स्थान पर किया जाएगा। इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसानों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।

इस केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर बासमती परीक्षण के लिए ऑल इंडिया समन्वित अनुसंधान परियोजना केंद्र के रूप में भी नामित किया गया है। इससे पीलीभीत, उत्तर प्रदेश के बासमती जीआई क्षेत्र में तीसरा प्रमुख अनुसंधान केंद्र बन गया है। इस व्यवस्था के माध्यम से क्षेत्र की जलवायु के अनुसार नई बासमती किस्मों का वैज्ञानिक परीक्षण और मूल्यांकन किया जाएगा। वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भारत की पहली एआई आधारित बासमती धान सर्वे परियोजना (2026–2028) का भी शुभारंभ किया। यह परियोजना एपीडा द्वारा ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सहयोग से लागू की जाएगी।

इस परियोजना के तहत लगभग 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया जाएगा, 1.5लाख से अधिक जमीनी आंकड़ों का संग्रह किया जाएगा और 5लाख से अधिक किसानों को जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य सटीक फसल आकलन, किस्मों की पहचान, वैज्ञानिक सलाह और निर्यात योजना को बेहतर बनाना है। भारत का बासमती, जो एक जीआई उत्पाद है, वर्ष 2025–26 में 5.67 अरब डॉलर के निर्यात मूल्य तक पहुंच गया, जबकि इसकी मात्रा लगभग 6.5मिलियन मीट्रिक टन रही। यह क्षेत्र भारत के कृषि निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है और मध्य पूर्व, यूरोप तथा उत्तरी अमेरिका के बाजारों में इसकी मजबूत उपस्थिति बनी हुई है।



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