इस माह भारत में मौसम बदलाव के साथ ही स्वाइन फ्लू के बढ़ रहे केसेस ने सभी को चिंता में डाल दिया है। यह कोई नया स्ट्रेन या नई महामारी नहीं है, बल्कि मौसमी इन्फ्लुएंजा का बढ़ा हुआ प्रसार है। पिछले 10 दिन में दिल्ली-एनसीआर में इसके केस 6 गुना बढ़े हैं, सरकार ने वहां अलर्ट भी जारी किया है। दिल्ली में इस साल इन्फ्लुएंजा के 3,000 केस, जिसमें 2,308 केस एचवीएनवी के हैं। एक दिन में 114 नए एचवीएनवी केस आने से सरकार में हलचल मच गई है। कई राज्यों के स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए एडवाइजरी जारी कर अस्पतालों को तैयार रहने और संदिग्ध मामलों की निगरानी के निर्देश दिए हैं। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष स्वाइन फ्लू के करीब छह गुना केस की वृद्धि हुई है। भारत में महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, केरल में इसके केसेस आ रहे हैं। सबसे ज्यादा केस दिल्ली में आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि सावधानी ही इसका बचाव है। मुख्यत: यह श्वसन मार्ग से फैलता है। इसके लिए रोजमर्रा सावधानियां बरतनी जरूरी है। इसके लिए भीड़भाड़ वाली या बंद जगहों में अच्छी गुणवत्ता का मास्क पहनें, खासकर जब आसपास फ्लू जैसे लक्षण वाले लोग हों। खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकें। हाथ साबुन से बार-बार धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर इस्तेमाल करें। आंख, नाक और मुंह को बार-बार हाथ ना लगाएं। बुखार, खांसी या गले में दर्द होने पर दूसरों से दूरी रखें और घर पर आराम करें। बुखार आने पर स्कूल,ऑफिस व भीड़ में जाने से बचें। कमरे में हवा का अच्छा आवागमन रखें। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवा ना लें। अगर सांस लेने में कठिनाई हो, सीने में दर्द या दबाव हो, बहुत ज्यादा कमजोरी या बेहोशी हो, होंठ या चेहरा नीला पडऩे लगे,तेज बुखार या हालत तेजी से बिगड़ रही हो जैसे लक्षण दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सक से जांच करवाएं।

