Saturday, August 22, 2026 |
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युवाओं में नशे की लत को रोकने में सरकारी योजनाएं है नाकाफी

Government schemes are inadequate in curbing substance abuse among the youth.

by Business Remedies
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भारत के युवाओं में नशाखोरी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। अधिकांश युवा किसी ना किसी नशे के संपर्क में हैं। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल, मणिपुर, मिजोरम, दिल्ली एनसीआर के युवा नशे की लत से सबसे ज्यादा प्रभावित है। पहले जहां तम्बाकू, शराब व चरस जैसा नशा गरीब बस्तियों की समस्या थी, अब स्कूल-कॉलेज, कोचिंग हब, शहरों और संपन्न परिवारों में भी तेजी से फैल रहा है। अब तो भारत में नशे के स्वरूप में शराब और तंबाकू के साथ-साथ गांजा-कैनाबिस, अफीम व हेरोइन जैसे ओपिओइड, फार्मास्यूटिकल ड्रग्स तथा अन्य पदार्थ युवाओं को नशे का आदि बना रहे हैं। पिछले दिनों ही राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में भरपूर मात्रा में नशे की खेप पकड़ी गई थी। सरकार ने इसके लिए नशामुक्त भारत अभियान जैसी योजनाएं शुरू तो की हैं, पर यह इसे रोकने में नाकाफी है। अगर यह आदत नहीं रुकी, तो देश की युवा शक्ति बर्बाद हो जाएगी और आर्थिक-सामाजिक विकास रुक जाएगा। भारत में युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या मानना पर्याप्त नहीं है। यह स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, परिवार, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक वातावरण और राष्ट्रीय उत्पादकता—सभी से जुड़ा हुआ प्रश्न है। खास तौर पर युवा आबादी के बड़े हिस्से के कारण यह विषय भारत के भविष्य से सीधे जुड़ जाता है। वर्तमान में बढ़ती नशे की प्रवृति के पीछे कोई एक कारण नहीं है बल्कि कई कारण एक-दूसरे को मजबूत करते हैं। इनमें साथियों का दबाव, एक बार लेने से कुछ नहीं होगा जैसी सोच धीरे-धीरे आदत में बदल जाती है। पढ़ाई, प्रतियोगिता, बेरोजगारी, रिश्तों की समस्याएं और भविष्य की चिंता इसका मुख्य कारक है। इसके अलावा वर्तमान में परिवार में संवाद की कमी, सोशल मीडिया और डिजिटल वातावरण, आसान उपलब्धता, शहरीकरण और सामाजिक बदलाव, बेरोजगारी और उद्देश्यहीनता और घर में नशे का वातावरण भी नशे की लत को बढ़ाने में सहायक बन रहे हैं। इसलिए केवल युवाओं में संस्कारों की कमी है कहना समस्या को बहुत सरल बना देना होगा। नशा रोकने के लिए युवाओं को अपराधी समझने से ज्यादा जरूरी है कि उन्हें स्वस्थ विकल्प, मानसिक सहारा, शिक्षा, रोजगार और समय पर उपचार मिले।



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