देशभर में 2 जुलाई तक कुल 26.35 करोड़ सत्यापित APAAR ID तैयार किए जा चुके हैं। यह पहल ‘One Nation, One Student ID’ अभियान के तहत प्रत्येक विद्यार्थी को एकल शैक्षणिक पहचान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। रविवार को जारी आधिकारिक तथ्य पत्र के अनुसार, यह व्यवस्था देश की शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, लचीला और डिजिटल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। APAAR ID विद्यार्थियों के लिए जारी किया जाने वाला एक विशिष्ट 12 अंकों का पहचान नंबर है, जिसे ABC प्रणाली से जोड़ा गया है। यह DigiLocker और Academic Bank Of Credits (ABC) मंच के माध्यम से उपलब्ध रहता है। इसके जरिए किसी भी विद्यार्थी की उच्च शिक्षा, कौशल शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा और अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों से जुड़े सभी रिकॉर्ड एक ही डिजिटल मंच पर सुरक्षित रखे जाते हैं।
तथ्य पत्र में बताया गया है कि भविष्य में विद्यालयी शिक्षा के रिकॉर्ड भी NAD-ABC के अंतर्गत APAAR ID से जोड़े जाएंगे और उन्हें डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा। वहीं, दूरदराज और सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थी अपने नजदीकी Common Service Centre (CSC) के माध्यम से भी APAAR ID बनवा सकेंगे। सरकार के अनुसार, ABC प्रणाली का मुख्य उद्देश्य ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना है जो विद्यार्थी-केंद्रित और लचीली हो। इसके माध्यम से विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों को सुरक्षित रखा जा सकेगा, उन्हें भविष्य में मान्यता मिलेगी और जीवनभर आवश्यकता पड़ने पर उनका उपयोग किया जा सकेगा।
यह व्यवस्था National Education Policy (NEP)2020 और National Credit Framework (NCrF) के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करती है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा, विभिन्न संस्थानों में प्रवेश और निकास के अनेक विकल्प तथा अलग-अलग संस्थानों और विषयों में अर्जित शिक्षा की मान्यता प्राप्त होगी। यदि कोई विद्यार्थी अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ देता है, तो उसके द्वारा अर्जित किए गए शैक्षणिक क्रेडिट ABC के डिजिटल डाटाबैंक में सुरक्षित रहेंगे। बाद में जब वह दोबारा पढ़ाई शुरू करेगा, तब वह उन्हीं क्रेडिट का उपयोग अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए कर सकेगा। इन क्रेडिट के उपयोग और हस्तांतरण के लिए उनकी वैधता 7 वर्ष निर्धारित की गई है।
ABC और APAAR ID की मदद से विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। इससे विभिन्न शिक्षण संस्थानों के बीच क्रेडिट स्थानांतरण की प्रक्रिया आसान होगी, शैक्षणिक रिकॉर्ड का रखरखाव अधिक पारदर्शी बनेगा और विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा जारी रखने में सुविधा मिलेगी। यह डिजिटल व्यवस्था विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, कौशल प्रशिक्षण संस्थानों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अन्य संगठनों को भी एक साझा मंच से जोड़ने का कार्य करेगी। इससे पूरे देश में एक मजबूत, विश्वसनीय और एकीकृत डिजिटल शिक्षा तंत्र विकसित होगा, जो प्रत्येक विद्यार्थी के लिए शिक्षा को अधिक सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाएगा।

