Monday, July 6, 2026 |
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भारत-चीन वार्ता से रिश्ते सामान्य होने की उम्मीद

by Business Remedies
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punit jain

रूस के कजान में ब्रिक्स बैठक से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच पांच साल में पहली बार औपचारिक मुलाकात हुई, जिससे दोनों देशों के संबंधों में सुधार को लेकर उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं। बैठक का सौहार्दपूर्ण स्वर इस मुश्किल रिश्ते के लिए मायने रखता है।
दोनों नेताओं ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैन्य गतिरोध को हल करने के लिए समझौते का स्वागत किया और घोषणा की कि दोनों देशों के बीच संवाद प्रक्रिया को जल्द शुरू किया जाएगा, जिसमें दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि भाग लेंगे और सीमा विवाद से जुड़े मसले हल करने का प्रयास करेंगे।
एशिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंधों को सुधारने की इस पहल का स्वागत किया जाना चाहिए। बहरहाल, भारत को इस प्रक्रिया में आगे बढ़ते हुए सावधान और सतर्क रहना होगा।
मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया है कि सीमा पर शांति बरकरार रखना भारत की प्राथमिकता है। एशिया के इन दोनों दिग्गज देशों के बीच संबंध सामान्य होने पर बहुत कुछ निर्भर है। भारत को अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए रिश्ते के विभिन्न पहलुओं पर काम करना होगा। इनमें पहला है सीमा पर हालात सामान्य करना और वर्ष 2020 के पहले की स्थिति हासिल करना। इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम करते हुए भी उसे ऐसी क्षमताएं विकसित करनी होंगी ताकि इस तरह की परिस्थितियां कभी दोहराई न जाएं। रिश्तों का दूसरा पहलू आर्थिक है। दुनिया के अधिकांश देशों की तरह भारत भी कई चीजों के लिए चीन पर निर्भर है। चीन 2023-24 में अमेरिका को पीछे छोडक़र भारत का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार बन गया। भारत, दूरसंचार और बिजली संबंधी कलपुर्जों, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और औषधियों समेत कई उच्च प्रौद्योगिकी वाली वस्तुओं के लिए चीन पर निर्भर है।



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