Wednesday, August 12, 2026 |
Home Share MarketAI उछाल से बनी तकनीकी कंपनियों की वैल्यूएशन पर ZOHO के श्रीधर वेंबु की चेतावनी, बोले- 1999 से भी बड़ा बुलबुला

AI उछाल से बनी तकनीकी कंपनियों की वैल्यूएशन पर ZOHO के श्रीधर वेंबु की चेतावनी, बोले- 1999 से भी बड़ा बुलबुला

by Business Remedies
0 comments
Zoho Founder Sridhar Vembu Warns About AI Driven Tech Bubble And High Technology Company Valuations

ज़ोहो कॉरपोरेशन के संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक श्रीधर वेंबु ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को लेकर निवेशकों के बढ़ते उत्साह के बीच दुनिया की कुछ सबसे बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों की ऊंची वैल्यूएशन पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि वर्तमान स्थिति शेयर बाजार में एक बड़े बुलबुले जैसी दिखाई दे रही है, जो वर्ष 1999 के डॉट-कॉम दौर से भी बड़ा हो सकता है।

श्रीधर वेंबु ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर किए गए एक पोस्ट में कहा कि कई बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के मूल्यांकन अब उनके वास्तविक कारोबार और वित्तीय आधार से काफी आगे निकल चुके हैं। उन्होंने कंपनियों के प्राइस-टू-सेल्स अनुपात का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्तमान वैल्यूएशन निवेशकों की अत्यधिक उम्मीदों को दर्शाती है। उनके अनुसार, चिप निर्माण क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एनवीडिया का प्राइस-टू-सेल्स अनुपात लगभग 20 गुना है। वहीं एप्पल, अल्फाबेट और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां लगभग 10 से11 गुना के स्तर पर कारोबार कर रही हैं। मेटा प्लेटफॉर्म्स का यह अनुपात करीब 7.5 गुना है, जबकि माइक्रॉन टेक्नोलॉजी लगभग 19 गुना के स्तर पर कारोबार कर रही है।

अपनी चिंता को स्पष्ट करने के लिए वेंबु ने सन माइक्रोसिस्टम्स के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्कॉट मैकनीली की वर्ष 2002 की टिप्पणी का भी उल्लेख किया। मैकनीली ने डॉट-कॉम बुलबुले के फूटने के बाद कहा था कि यदि कोई निवेशक किसी कंपनी की वार्षिक आय के 10 गुना मूल्य पर निवेश करता है, तो उसे उस निवेश का उचित प्रतिफल पाने के लिए कई वर्षों तक असाधारण प्रदर्शन और भारी लाभप्रदता की आवश्यकता होगी। वेंबु ने कहा कि यदि किसी कंपनी का मूल्य उसकी आय के मुकाबले बहुत अधिक हो जाता है, तो उस मूल्यांकन को सही साबित करने के लिए कंपनी को लंबे समय तक लगातार तेज वृद्धि और उच्च मुनाफा दर्ज करना पड़ता है। ऐसा नहीं होने पर निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने वर्तमान स्थिति की तुलना 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में आए तकनीकी उछाल से करते हुए कहा कि बाजार में जो माहौल दिखाई दे रहा है, वह एक “अत्यधिक बड़ा बुलबुला” है। उनका मानना है कि यह बुलबुला वर्ष 1999 में देखे गए बुलबुले से भी बड़ा हो सकता है। श्रीधर वेंबु ने अपने पोस्ट में कहा कि बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों का प्राइस-टू-सेल्स अनुपात काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि एनवीडिया 20 गुना, एप्पल 10 गुना, अल्फाबेट 11 गुना, माइक्रोसॉफ्ट 10 गुना, मेटा 7.5 गुना और माइक्रॉन 19 गुना के अनुपात पर कारोबार कर रही हैं।

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में लगातार तेजी देखी जा रही है। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर और सॉफ्टवेयर क्षेत्र की कंपनियों को निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला है। बाजार को उम्मीद है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आने वाले वर्षों में विभिन्न उद्योगों की उत्पादकता और विकास दर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी। एआई से जुड़े उत्साह ने कई प्रौद्योगिकी कंपनियों के बाजार पूंजीकरण को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके साथ ही प्रमुख वैश्विक शेयर सूचकांकों ने भी नए उच्च स्तर दर्ज किए हैं। हालांकि, वेंबु का मानना है कि निवेशकों को केवल भविष्य की संभावनाओं के आधार पर अत्यधिक ऊंची वैल्यूएशन को सही नहीं मान लेना चाहिए और उन्हें कंपनियों के वास्तविक वित्तीय प्रदर्शन पर भी ध्यान देना चाहिए।



You may also like

Leave a Comment