दूध और दुग्ध उत्पादों के पोषण, स्वास्थ्य तथा अर्थव्यवस्था में योगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य को लेकर आज विश्व दुग्ध दिवस मनाया जाएगा। दूध पोषण का प्रमुख स्रोत है। इसमेंं कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन डी, पोटेशियम आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाते हैं, बच्चों के विकास में सहायक होते हैं, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। वहीं यह दिन डेयरी किसानों, पशुपालकों और दुग्ध उद्योग से जुड़े लोगों के योगदान को पहचान देने के लिए भी मनाया जाता है। भारत जैसे देशों में डेयरी उद्योग लाखों परिवारों की आय का स्रोत है। इससे ग्रामीण रोजगार और महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलता है। आजकल विश्व दुग्ध दिवस पर पर्यावरण-अनुकूल डेयरी उत्पादन, पशु कल्याण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर भी जोर दिया जाता है। विश्व दुग्ध दिवस की शुरुआत वर्ष, 2001 में फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन की ओर से की गई थी। आज दुनिया के 100 से अधिक देशों में यह दिवस विभिन्न कार्यक्रमों, जागरूकता अभियानों, स्वास्थ्य शिविरों और डेयरी प्रदर्शनियों के माध्यम से मनाया जाता है। जहां भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है। यहां श्वेत क्रांति ने दुग्ध उत्पादन में बड़ा परिवर्तन लाया गया। वहीं भारत की श्वेत क्रांति के जनक कहा जाता है। इसलिए भारत में विश्व दुग्ध दिवस का सामाजिक और आर्थिक महत्व विशेष रूप से अधिक है।

