जयपुर, 2 दिसंबर। विश्व दिव्यांग दिवस (3 दिसंबर) को उमंग ने एक उत्सव के रूप में मनाया। उत्सव के अंतर्गत पूरे सप्ताह भर विविध गतिविधियों, खेल और संवादों के माध्यम से समावेशन की भावना को बढ़ावा दिया गया, जिसने इस आयोजन को वास्तविक अर्थों में “विभिन्नताओं का उत्सव” बना दिया। इस वर्ष कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को विविधता को समझने, सराहने और अपनाने के लिए प्रेरित करना था। इसी उद्देश्य से उमंग के विद्यार्थियों और स्टाफ ने जयपुर के तीन विद्यालयों जयश्री पेरिवाल स्कूल (चित्रकूट), कैम्ब्रिज कोर्ट वर्ल्ड स्कूल (मानसरोवर) और वर्धमान स्कूल में जागरूकता मेलों का आयोजन किया। इस आयोजन में सीनियर छात्रों ने ज्ञानवर्धक और मनोरंजक गतिविधियों में पूरे उत्साह से भाग लिया।
विद्यालय परिसरों में विभिन्न स्थानों पर दिव्यांगता पर आधारित रंगीन एवं जानकारीपूर्ण पोस्टर्स लगाए गए, जिनसे छात्र महत्वपूर्ण तथ्य जान सके। इन्हीं तथ्यों के आधार पर विभिन्न खेलों में भाग लेकर छात्रों ने पुरस्कार भी जीते, जिससे सीखने की प्रक्रिया अधिक रोमांचक बन गई।
सबसे अधिक पसंद किए जाने वाली गतिविधियों में व्हीलचेयर के माध्यम से स्थानों पर नेविगेट करना, आंखों पर पट्टी बांधकर कार्य पूरे करना, और चार्ट की मदद से बुनियादी सांकेतिक भाषा सीखना आदि शामिल थे, जिनसे छात्रों को दिव्यांगता का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। इन अनुभवों ने छात्रों में जिज्ञासा, सहानुभूति और सार्थक संवाद को बढ़ावा दिया। तीनों स्कूलों में आयोजित मेलों में वातावरण उत्साह से भरपूर था। छात्रों की सक्रिय भागीदारी ने पूरे आयोजन को जागरूकता, संवेदनशीलता और आनंद के एक जीवंत उत्सव में बदल दिया।
इस अवसर पर उमंग की निदेशक, दीपक कालरा ने कहा, “जब हम किसी को वास्तव में समझते हैं, तभी हम उन्हें स्वीकार कर पाते हैं। उमंग का उद्देश्य एक ऐसे समावेशी समाज का निर्माण करना है, जहाँ दिव्यांग और सामान्यजन साथ मिलकर सद्भावपूर्वक जीवन व्यतीत करें और विभिन्नताओं को मिटाने के बजाय उनका उत्सव मनाएं।”
सप्ताह भर चले इस आयोजन ने उमंग के इस विजन को साकार किया — सभी को याद दिलाया कि समावेशन सिर्फ़ एक आइडिया नहीं है, बल्कि जीवन का वह अनुभव है, जो समझ से शुरू होता है।

