- कारोबारी से बिना संवाद के लिया गया फैसला
- पहले से ही मंडी कारोबारी जीएसटी, मंडी यूजर टैक्स, लीज मनी, कृषक कल्याण फीस करवा रहा है जमा
धैर्यवर्धन सिंह राजावत जयपुर। राज्य सरकार द्वारा कृषि उपज मंडियों में व्यापार करने वाले लाइसेंसधारी व्यापारियों पर यूजर चार्ज लगाया गया है और इस आदेश के बाद प्रदेशभर की मंडियों में व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। किसानों और व्यापारियों में भारी आक्रोश है। आदेश के अनुसार, मंडी और उप-मंडी यार्डों के भीतर गैर-अधिसूचित कृषि उपज एवं खाद्य पदार्थों पर प्रति 100 रुपए के लेनदेन पर 50 पैसे यूजर चार्ज देना होगा। मंडी यार्ड के बाहर व्यापार करने वालों को इस शुल्क से छूट दी गई है।
यूजर चार्ज के दायरे में आने वाले उत्पाद
– दाल
– चावल
– आटा
– मैदा
– सूजी
– तिलहन
– खाद्य तेल
– ड्राई फ्रूट्स
– अन्य कई खाद्य उत्पाद
शक्कर को इस शुल्क से बाहर रखा गया है।
व्यापार ठप, सरकार को करोड़ों का नुकसान
खाद्य पदार्थ व्यापार संघ जयपुर के अध्यक्ष रामचरण नाटाणी और महामंत्री अविनाश जैन ने बताया कि इस आदेश के विरोध में व्यापारियों का धरना तीसरे दिन भी जारी है। पिछले तीन दिनों से मंडी में कोई कारोबार नहीं हो पा रहा, जिससे सरकार को भी बड़ा राजस्व नुकसान हो रहा है। सिर्फ जयपुर मंडी की बात करें तो हर दिन लगभग 20 से 25 करोड़ रुपये का जीएसटी नुकसान हुआ है। पूरे प्रदेश की मंडियों में यह नुकसान प्रतिदिन 200 से 300 करोड़ रुपये तक पहुँच रहा है।
नियमों में भेदभाव का आरोप :
व्यापारियों का आरोप है कि सरकार ने एक ही व्यापार को मंडी के अंदर और बाहर दो हिस्सों में बाँटकर दो अलग नियम लागू कर दिए हैं। सह-मंत्री सतीश पापड़ीवाल के अनुसार राज्य सरकार बड़े मॉल्स और मल्टीनेशनल कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए मंडी व्यापारियों पर टैक्स का बोझ डाल रही है।
उपमुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन :
व्यापारियों ने यूजर चार्ज वापस लेने की मांग करते हुए उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी को ज्ञापन भी सौंपा है और चेतावनी दी है कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो धरना और बंद अगली सूचना तक जारी रहेगा।
प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे मंडी कारोबारी: खाद्य पदार्थ व्यापार संघ जयपुर के अध्यक्ष रामचरण नाटाणी ने उदाहरण देते हुए बताया कि तेल का पीपा मंडी में यूजर चार्ज के बाद 5000 रुपए बिकेगा तो बाहर 4975 रुपए बिकेगा। इसके चलते मंडी कारोबारी प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 247 मंडियां है और उनमें करीब 90 मिक्स यूज वाली मंडियां है। यूजर चार्ज के बाद इनका कारोबार तबाह हो जाएगा और बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार भी प्रभावित होगा। व्यापार मंडी से छिटककर मल्टीनेशनल कंपनियों के हाथों में चला जाएगा। नजदीकी अन्य राज्यों में इस प्रकार का कोई यूजर चार्ज नहीं है। यूजर चार्ज से पड़ोसी राज्यों के साथ होने वाला कारोबार भी बुरी तरीके से प्रभावित होगा। यूजर चार्ज से पशु आहार का कारोबारी भी मंडी से बाहर स्थानांतरित हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि पहले से ही मंडी कारोबारी जीएसटी, मंडी यूजर टैक्स, लीज मनी, कृषक कल्याण फीस जमा करवा रहा है। कारोबारी ने खून पसीने की कमाई से दुकानों की जड़ खरीद की है। यूजर चार्ज का फैसला करने से पूर्व सरकार ने कारोबारी के साथ किसी भी प्रकार का संवाद भी नहीं किया। पहले एक बार चीनी के कारोबार में भी इसी प्रकार की दिक्कत आई थी। चीनी पर मंडी में टैक्स लगता था लेकिन बाहर नहीं। इससे कई व्यापारी फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में चीनी मंगा कर बाजार में बेचते थे। कीमतों में अंतर होने के कारण जहां सरकार को मंडी टैक्स का नुकसान होता था वहीं मंडी व्यापार भी प्रभावित होता था। यूजर चार्ज से भी ऐसे ही आशंका उत्पन्न हो रही है।

