Thursday, February 26, 2026 |
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अमेरिकी कर बढ़ोतरी से भारतीय सौर कंपनियों के शेयरों में गिरावट

by Business Remedies
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Solar panel manufacturing unit and falling solar company shares

मुंबई,

घरेलू सौर और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में बुधवार को शुरुआती कारोबार के दौरान तेज गिरावट देखी गई। यह गिरावट तब आई जब अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने भारत से आयात होने वाले सौर सेल और सौर पैनल पर लगभग 125.87 प्रतिशत का प्रारंभिक प्रतिकर शुल्क लगाने की घोषणा की। इस निर्णय के बाद stock market update में सौर क्षेत्र के शेयरों पर दबाव साफ नजर आया।

विभिन्न कंपनियों के शेयर लुढ़के

वारे ऊर्जा लिमिटेड का शेयर 14.6 प्रतिशत तक गिरकर 2,580 रुपये 50 पैसे के स्तर पर पहुंच गया और निचले सर्किट को छू लिया। बाद में इसमें कुछ सुधार हुआ और यह 2,724 रुपये पर रहा, जो 9.90 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। प्रीमियर ऊर्जा लिमिटेड का शेयर 4.57 प्रतिशत टूटकर 741 रुपये 55 पैसे पर आ गया, जबकि दिन के दौरान यह 666 रुपये 90 पैसे के निचले स्तर तक फिसल गया था। विक्रम सौर लगभग 7 प्रतिशत गिरा। वारे नवीकरणीय टेक्नोलॉजीज में 6 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई। सोलेक्स ऊर्जा करीब 5 प्रतिशत फिसली, सात्विक हरित ऊर्जा लगभग 3 प्रतिशत टूटी और बोरोसिल नवीकरणीय में 1 प्रतिशत से कुछ अधिक की गिरावट रही।

अमेरिका का कदम और कारण

अमेरिका के वाणिज्य विभाग द्वारा जारी तथ्य पत्र के अनुसार, यह प्रतिकर शुल्क निर्यातक देशों द्वारा दी जा रही कथित अनुचित सब्सिडी के जवाब में लगाया गया है। भारत पर 125.87 प्रतिशत, इंडोनेशिया पर 104.38 प्रतिशत और लाओस पर 80.67 प्रतिशत की दर तय की गई है। यह कदम अमेरिकी सौर विनिर्माण एवं व्यापार गठबंधन की याचिका के बाद उठाया गया, जिसमें हनव्हा क्यूसेल्स, फर्स्ट सोलर और मिशन सोलर जैसी कंपनियां शामिल हैं। विभाग मार्च में एक और निर्णय लेने की तैयारी में है, जिसमें यह देखा जाएगा कि क्या इन देशों के निर्यातकों ने अमेरिका में उत्पादों को उत्पादन लागत से कम कीमत पर बेचा। यदि यह आरोप सही पाया गया तो अतिरिक्त एंटी-डंपिंग शुल्क भी लगाया जा सकता है।

अरबों डॉलर का व्यापार प्रभावित

अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार, भारत, इंडोनेशिया और लाओस से पिछले वर्ष लगभग 4.5 अरब डॉलर के सौर पैनल आयात किए गए थे। वर्ष 2025 में अमेरिका के कुल सौर आयात में इन देशों की हिस्सेदारी लगभग दो-तिहाई रही। व्हाइट हाउस ने पिछले सप्ताह स्पष्ट किया था कि भारत पर 24 फरवरी से अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि आने वाले हफ्तों में अतिरिक्त शुल्क लगाने के प्रावधानों का भी उपयोग किया जा सकता है। एक प्रेस वार्ता के दौरान ट्रंप ने कहा कि अन्य कानूनी धाराएं भी उपलब्ध हैं, जिनके आधार पर आगे और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। अमेरिका के इस फैसले से घरेलू सौर उद्योग की कंपनियों पर निकट भविष्य में दबाव बने रहने की आशंका है, जबकि निवेशकों की नजर अब मार्च में आने वाले अगले निर्णय पर टिकी है।



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