मुंबई,
देश की विमानन कंपनी स्पाइसजेट के शेयरों में बुधवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। stock market update के दौरान कंपनी का शेयर 10 प्रतिशत टूटकर निचले स्तर पर पहुंच गया और 11 वर्षों के सबसे निचले भाव पर बंद हुआ। भारी ब्लॉक सौदों के चलते बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार के दौरान कंपनी की लगभग 8.4 प्रतिशत हिस्सेदारी का लेनदेन हुआ। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कुल 12 करोड़ 86 लाख शेयर 17 ब्लॉक सौदों के माध्यम से खरीदे-बेचे गए। इससे यह शेयर दिन के सबसे अधिक सक्रिय शेयरों में शामिल रहा। कारोबार की मात्रा पिछले तीन महीनों के औसत दैनिक स्तर से 16 गुना अधिक रही, जो तेज बिकवाली और निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है। सुबह 11 बजे तक शेयर 12 रुपये 88 पैसे पर निचले सर्किट में बंद हो गया, जो 11 वर्षों से अधिक समय का सबसे निचला स्तर है।
यह लगातार सातवां कारोबारी सत्र रहा जब कंपनी के शेयर में गिरावट दर्ज की गई। पिछले एक सप्ताह में ही शेयर लगभग 25 प्रतिशत टूट चुका है। बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक में यह दिन का सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला शेयर बनकर उभरा। तकनीकी संकेतक भी शेयर में अत्यधिक कमजोरी दिखा रहे हैं। 14 दिन का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 9.01 तक गिर गया, जो आमतौर पर अत्यधिक बिकवाली की स्थिति को दर्शाता है। गौरतलब है कि हाल ही में कंपनी ने अपने परिचालन विस्तार की योजना घोषित की थी। स्पाइसजेट ने बताया था कि वह वेट और डैम्प लीज व्यवस्था के माध्यम से अपने बेड़े में विमानों की संख्या बढ़ाकर लगभग 60 करने पर काम कर रही है। इसके साथ ही जो विमान पहले से जमीन पर खड़े हैं, उन्हें दोबारा सेवा में लाने की प्रक्रिया भी जारी है।
कंपनी ने कहा कि उसका घरेलू बाजार हिस्सा सितंबर में 1.9 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर में 4.3 प्रतिशत हो गया है। दिसंबर तिमाही में क्षमता में 56 प्रतिशत की वृद्धि ने इस सुधार में सहारा दिया। कंपनी ने शीतकाल 2026 तक अपनी कुल उपलब्ध सीट किलोमीटर क्षमता को बढ़ाकर 220 करोड़ करने का लक्ष्य तय किया है, जो वर्तमान स्तर से दोगुना से अधिक है। हालांकि परिचालन चुनौतियां अब भी कंपनी पर दबाव बनाए हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार बकाया भुगतान के कारण बांग्लादेश ने स्पाइसजेट को अपने वायु क्षेत्र के उपयोग से रोक दिया है। इसके चलते कोलकाता से गुवाहाटी सहित कुछ उड़ानें अब लंबा मार्ग अपनाकर संचालित की जा रही हैं, जिससे परिचालन लागत और दबाव दोनों बढ़ रहे हैं।

