मुंबई,
भारतीय शेयर बाजार में अगले सप्ताह उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, क्योंकि निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नई मौद्रिक नीति, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड प्रतिफल दरों पर रहेगी। विश्लेषकों के अनुसार, पिछले सप्ताह बाजार में कमजोरी देखने को मिली थी और यही प्रमुख कारक सोमवार से शुरू होने वाले कारोबारी सप्ताह में भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना रहा। Sensex 117अंक गिरकर 74,243पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50अंक फिसलकर 23,367पर बंद हुआ।
बाजार सहभागियों की सबसे बड़ी चिंता पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति है। अमेरिकी सेना ने बताया कि उसने ईरान की ओर से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य की दिशा में भेजे गए ड्रोन को रोकने के बाद ईरानी तटीय रडार और निगरानी केंद्रों पर कार्रवाई की। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इन ड्रोन का लक्ष्य क्षेत्र में समुद्री यातायात था। इसके बाद गोरुक और क़ेश्म द्वीप स्थित निगरानी केंद्रों पर किए गए हमलों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों में संभावित व्यवधान की आशंकाओं को बढ़ा दिया है। इससे कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक निवेशक धारणा पर असर पड़ सकता है। इस बीच RBI की मौद्रिक नीति भी निवेशकों के लिए प्रमुख केंद्र में रहेगी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को घोषणा की कि मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.25प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण ऊर्जा कीमतों में संभावित बढ़ोतरी और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को देखते हुए महंगाई के जोखिम अभी भी बने हुए हैं। इसी कारण नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। RBI ने अनिवासी भारतीयों और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों के लिए इक्विटी निवेश साधनों में निवेश सीमा बढ़ाने की भी घोषणा की है। इस कदम का उद्देश्य विदेशी पूंजी प्रवाह को प्रोत्साहित करना और घरेलू वित्तीय बाजारों को अतिरिक्त समर्थन प्रदान करना है। विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। लगातार विदेशी पूंजी निकासी से बाजार पर दबाव बढ़ सकता है और निवेशकों की धारणा प्रभावित हो सकती है।
वहीं, वैश्विक ब्याज दरों को लेकर बढ़ती आशंकाएं भी बाजार की चाल पर असर डाल सकती हैं। अमेरिका में महंगाई संबंधी चिंताओं के कारण पिछले सप्ताह ट्रेजरी प्रतिफल दरों में तेजी दर्ज की गई। दो वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल 15महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। आमतौर पर बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने पर निवेशकों को निश्चित आय वाले निवेश साधनों में बेहतर प्रतिफल मिलने लगता है, जिससे शेयर बाजार का आकर्षण कम हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप दुनिया भर के शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की संभावना रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया की स्थिति, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतें और RBI की नीतिगत दिशा अगले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख निर्णायक कारक साबित हो सकते हैं।

