कुमार पतसारिया | बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप सरकार की ओर से बढ़ाए गए टैरिफ को लेकर प्रतिदिन नीत नए निर्णय से भारत के निर्यातकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। गत दिवस ही ट्रंप सरकार ने आयात पर अतिरिक्त टैरिफ लागू करने के ठीक बाद इसे ९० दिन के लिए रोक दिया है। ट्रंप ने यह राहत उन देशों को दी है, जिन्होंने जवाबी टैरिफ नहीं लगाया है। ट्रंप ने इस राहत से चीन को अलग रखा है, जिसने ८४ फीसदी जवाबी टैरिफ लगाया था। चीन पर अब वह १२५ फीसदी टैरिफ लगाएंगे। ऐसे में चीन, यूरोपीय यूनियन और दुनिया के अन्य देशों की अमेरिका के साथ छिड़ी ट्रेड वार के बाद भारत के निर्यातक आशंकित है कि पाइपलाइन में जो आर्डर दिए हुए हैं वह उन्हें कैंसिल करें या नहीं।
वहीं वैश्विक बाजार में इन दिनों हलचल-सी मची हुई है। नए पारस्परिक टैरिफ से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर काफी प्रभाव पडऩे की संभावना जताई जा रही है। वहीं इससे भारत में जेम्स-ज्वैलरी एक्सपोर्ट सबसे ज्यादा प्रभावित होने की उम्मीद है। इसका कारण यह है कि जहां पहले भारत के निर्यात पर अमेरिका में जेम्स-ज्वैलरी पर ६ प्रतिशत टैरिफ था, जो पिछले दिनों ही बढ़ाकर २७ फीसदी कर दिया गया है।
निर्यात करीब ३० से ३५ फीसदी कम होने की संभावना
जेम्स-ज्वैलरी इम्पोर्ट पर ड्यूटी बढऩे से जयपुर से अमेरिका को होने वाला निर्यात करीब ३० से ३५ फीसदी कम होने संभावना है। वहां छोटे और मझौले निर्यातक तो टिक ही नहीं पाएंगे।
जो टिकेंगे उन्हें वहां बढ़ती कीमतों में माल देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। वहीं इससे भारत सरकार की जीडीपी भी कम हो जाने से अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। फिलहाल तो वेट एंड वॉच करना होगा और भारत सरकार को भी इस ओर अमेरिकी सरकार से बातचीत का रास्ता निकालकर पहल करनी होगी।
कटे और पॉलिश किए हीरे जैसे उत्पाद भी टैरिफ के दायरे में
नए टैरिफ के साथ ही कटे और पॉलिश किए गए हीरे जैसे उत्पाद, जिन पर पहले कोई शुल्क नहीं था, अब 27 प्रतिशत टैरिफ के दायरे में आ गए हैं। सोने और प्लैटिनम के आभूषणों पर काफी शुल्क लगेगा, जबकि चांदी के आभूषणों पर भी अधिक कर लगाया जा सकता है। प्रयोगशाला में उगाए गए हीरे और नकली आभूषणों जैसी अन्य वस्तुओं पर भी उल्लेखनीय वृद्धि हो जाएगी। अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 27 प्रतिशत टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण वाणिज्य मंत्रालय कर रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस ओर क्या विकल्प तलाश करती है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता
फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका गए थे। उस समय दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करने के लिए एक व्यापार समझौते की बात कही थी। दोनों देश समझौते के पहले चरण को इस वर्ष सितंबर-अक्टूबर तक अंतिम रूप देने के लिए बातचीत कर रहे हैं।
क्या है व्यापार समझौता?
व्यापार समझौते में दो व्यापारिक साझीदार देश या तो आयात या निर्यात शुल्क बड़े पैमाने पर घटाते हैं या ज्यादातर उत्पादों पर शुल्क खत्म कर देते हैं। इसके अलावा वे सेवाओं और निवेश में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नियमों को आसान बनाते हैं।
अमेरिका की ओर से जेम्स-ज्वैलरी पर जो टैरिफ बढ़ाया है, इससे एक्सपोटर्स को काफी परेशानी आ जाएगी। अमेरिका मार्केट में आभूषणों की कीमतें महंगी हो जाएगी, जिससे प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल भरा हो जाएगा। इसका सीधा प्रभाव जयपुर के ज्वैलरी एक्सपोर्ट पर पड़ेगा, क्योंकि जयपुर जेम्स-ज्वैलरी के हब के रूप में विख्यात रहा है। ऐसे में सरकार की रेवेन्यू में भी काफी कमी आ जाएगी। इससे भारत की जीडीपी पर इसका सीधा असर पड़ेगा। जहां एक ओर अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए निर्यातक जुटे हुए, लेकिन बढ़ते ट्रैरिफ से वह अपना माल वहां नहीं बेच पाएंगे।
-अशोक माहेश्वरी, संयोजक जस
अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने से भारत के जैम्स और ज्वैलरी एक्सपोर्ट पर गंभीर असर पड़ेगा। वर्तमान में भारत से जो भी एक्सपोर्ट हो रहा है, वह पहले से ही बहुत कम प्रॉफिट मार्जिन पर हो रहा है। बढ़े हुए टैरिफ से कीमतें और बढ़ जाएंगी, जिससे उत्पाद की प्रतिस्पर्धात्मकता और बिक्री की संभावनाएं कम हो जाएगी। गहनों और रत्नों का मुख्य आधार ही उनकी कीमत है। यदि कीमतें बढ़ेंगी, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदार अन्य देशों या वैकल्पिक स्रोतों से खरीदारी करेंगे। इससे भारतीय एक्सपोर्ट को भारी नुकसान होगा और ऑर्डरों में गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, महंगे टैरिफ का असर छोटे और मझोले एक्सपोर्टर्स पर अधिक पड़ेगा, क्योंकि उनके पास बड़े ब्रांड्स की तरह कीमतों को सहने की क्षमता नहीं होती। कुल मिलाकर यह निर्णय भारत के जैम्स और ज्वैलरी एक्सपोर्ट पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा और निर्यात में गिरावट लाएगा।
-नीरज लूणावत, मानद् सचिव,ज्वैलर्स एसोसिएशन, जयपुर
अमेरिकी सरकार द्वारा टैरिफ बढ़ाने से भारत के जेम्स-ज्वैलरी निर्यातकों पर काफी असर पड़ेगा। पर अगर भारत सरकार ज्वैलरी निर्यातक इकाई संचालकों को घरेलू बाजार में व्यापार करने की अनुमति दे देती है तो निर्यातकों का तैयार माल स्थानीय स्तर पर खप सकेगा और दूसरा स्थानीय खरीदारों को भी एक्सपोर्ट क्वॉलिटी की ज्वैलरी सुलभ हो सकेगी।
-शिवकरण जानू, चैयरमेन, गीताजंलि ज्वैलर्स, सीकर
अमेरिकी ड्यूटी बढऩे से निर्यातकों पर फर्क पडऩा लाजमी है। खासकर उन निर्यातकों पर ज्यादा प्रभाव पड़ेगा जो अमेरिकी बेज्ड कंपनियों को अपना माल भेजती हैं। अभी जेम्स-ज्वैलरी के निर्यातकों को वेट एंड वॉच की सोच पर चलना पड़ेगा,क्योंकि पांच-छह महीने बाद स्थिति संतुलित होने की उम्मीद है। फिलहाल तो ट्रंप द्वारा नीत नए फैसले से निर्यातकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
-राजू मंगोड़ीवाला, उपाध्यक्ष, ज्वैलर्स एसोसिएशन ऑफ जयपुर

