दिन पर दिन सब्जियों की दरों में बढ़ोतरी हो रही है। जहां राजस्थान सहित दिल्ली के कुछ इलाकों में टमाटर 100 रुपए के पार चला गया था। लेकिन केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद कीमतें कम हुई थीं। लेकिन एक बार फिर से इसके महंगे होने के आसार हैं। दरअसल हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के बाद टमाटर की फसल प्रभावित हो गईं हैं, जिससे राजस्थान सहित दिल्ली और अन्य बाजारों में टमाटर के दाम बढ़ सकते हैं। अभी बाजारों में टमाटर की कीमत 60 से 70 रुपये प्रति किलो है। लेकिन आशंका है कि जल्दी ही इसकी कीमत 100 के पार हो सकती है। हिमाचल प्रदेश उत्तर भारत के कई बाजारों में टमाटर का मुख्य आपूर्तिकर्ता है। बारिश के कारण सडक़ों को भी नुकसान पहुंचा है। यही नहीं हिमाचल के कई हिस्सों में सडक़ें भी बह गई है। इससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है। इससे कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। भारी बारिश से फसलों को नुकसान होने के साथ-साथ सडक़ों को भी नुकसान पहुंचा है। इससे सप्लाई चेन बाधित हो सकती है। सप्लाई चेन में व्यवधान होने से टमाटर की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में इस समय टमाटर का खुदरा दाम लगभग 70 रुपए प्रति किलो है, जबकि मुंबई में यह लगभग 80 रुपए प्रति किलो है। टमाटर की बढ़ती कीमतों से राहत देने के लिए केंद्र सरकार की एजेंसी राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ ने कुछ कदम उठाए हैं। इसने कुछ दिनों पहले कई इलाकों में 60 रुपए प्रति किलो की रियायती दर पर टमाटर बेचना शुरू कर दिया था, जिससे खुदरा बाजार में टमाटर की कीमतों में गिरावट आई थी। हालांकि, व्यापारियों को उम्मीद है कि कीमतें फिर से बढ़ेंगी। पिछले वर्ष भारी बारिश और बाढ़ के कारण कुछ खुदरा बाजारों में टमाटर की कीमतें 350 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई थीं। इस वजह से फास्ट फूड चेन मैकडोनाल्ड के नॉर्थ इंडिया ऑपरेटर को कुछ आउटलेट्स में टमाटर का उपयोग अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था। कंपनी का कहना था कि उनकी गुणवत्ता विनिर्देशों को पूरा करने वाले टमाटर बाजार में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। मानसून के महीनों में आमतौर पर सब्जियों की कीमतों में तेजी आती है। क्योंकि बारिश की वजह से शाक-सब्जियों की कटाई, तुड़ाई और पैकेजिंग सहित सभी कार्य प्रभावित होते हैं। बारिश से परिवहन के दौरान सब्जियों का अधिक नुकसान होता है जिसका असर कीमतों पर पड़ता है। हालांकि इस साल जून में ही कुछ बाजारों, खासकर दक्षिण भारत में टमाटर की कीमतें बढऩे लगीं। उस समय देश के बड़े हिस्से गंभीर गर्मी की मार झेल रहे थे। जिससे बागवानी फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

