आमदनी जैसे-जैसे लोगों की बढ़ रही है, वैसे-वैसे अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का बाजार भारत में तेजी से बढ़ रहा है। इसका बाजार कितनी तेजी से बढ़ रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि 11 साल में ही इसका मार्केट साइज तीन गुना से भी अधिक हो गया। इसके साथ ही बीमारियां भी लगातार बढ़ रही है। कुछ बीमारियों का तो अल्ट्रा प्रोसेस्ड से सीधा संबंध है। जो हमारे लिए चिंता का विषय बना हुआ है। जीवन के आधुनिक होने के बीच लोगों की भागदौड़ भी बढ़ गई है। इस बीच घरों में प्रोसेस्ड और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का दिनचर्या में कैसे घुसपैठ हो गई है, इसका पता ही नहीं चला है। यदि आप इसके आदि हैं, तो इससे तौबा कर लें। क्योंकि इससे न सिर्फ आपके घर का बजट बिगड़ रहा है बल्कि आपको खतरनाक बीमारियों के बीच भी धकेल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार डायबिटीज के लगातार बढ़ते मामलों का सीधा संबंध अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड से है। लेकिन इसका बाजार है कि बढ़ ही रहा है। साल 2022 में तो इसका बाजार बढ़ कर 2500 करोड़ रुपए के पार चला गया है। जानकारी के अनुसार डीप फ्राई, बेक्ड और ग्रिल किए गए अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ एडवांस्ड ग्लाइकेशन एंड प्रोडक्ट्स (एजीई) से भरपूर होते हैं। यह सूजन का कारण बनते हैं और डायबिटीज सहित कई बीमारियों का खतरा पैदा करते हैं। चेन्नई स्थित मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के डायबिटीज विशेषज्ञ का मानना है कि भारत में डायबिटीज से पीडि़त लोगों की संख्या 101 मिलियन है। अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स को कई श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। इसमें चॉकलेट और शुगर कंफेक्शनरी, साल्टी स्नैक्स, बीवरेजेज, रेडीमेड और कंवीनिएंस फूड्स और ब्रेकफास्ट सीरियल्स शामिल हैं। इस समय भारतीय परिवारों में व्हाइट ब्रेड, स्वीटेंड ब्रेकफास्ट सीरियल्स, फ्रॉजन फूड, एनर्जी ड्रिंक, फ्लेवर्ड पोटेटो चिप्स, सोडा, फ्लेवर्ड कैंडी बार, ब्लेंडेड कॉफी ड्रिंक, फ्रायड चिकन, मेस्ड पोटैटो फ्लेक्स आदि का सेवन खूब बढ़ रहा है। जब हम खाद्य पदार्थों को तलते या ग्रिल करते हैं तो इससे ऑक्सीडेटिव पैदा होता है, जो सूजन को बढ़ावा देता है। शरीर में पुरानी सूजन मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और यहां तक कि कुछ प्रकार के कैंसर से जुड़ी होती है। अत्यधिक ट्रांस वसा वाले फूड स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं।

