नई दिल्ली: टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने घोषणा की है कि वह 1 जुलाई से अपनी पूरी यात्री वाहन श्रृंखला की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करेगी। यह बढ़ोतरी आंतरिक दहन इंजन आधारित वाहनों और विद्युत वाहनों दोनों पर लागू होगी। कंपनी ने यह जानकारी शेयर बाजार को दी गई आधिकारिक सूचना के माध्यम से साझा की। कंपनी के अनुसार, कच्चे माल की बढ़ती लागत और लगातार बने हुए महंगाई के दबाव को आंशिक रूप से संतुलित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। टाटा मोटर्स ने कहा कि वह लागत वृद्धि का बड़ा हिस्सा स्वयं वहन कर रही है, लेकिन बढ़ते खर्चों के प्रभाव को कम करने के लिए कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाना आवश्यक हो गया है।
कंपनी ने स्पष्ट किया कि कीमतों में वृद्धि सभी मॉडलों और विभिन्न संस्करणों में समान नहीं होगी। अलग-अलग वाहनों और उनके संस्करणों के आधार पर मूल्य वृद्धि की सीमा अलग हो सकती है। यह बदलाव टाटा मोटर्स की पूरी यात्री वाहन श्रृंखला पर लागू होगा, जिसमें पारंपरिक ईंधन से चलने वाले वाहन और विद्युत वाहन दोनों शामिल हैं। वाहन निर्माता का कहना है कि मूल्य संशोधन को इस तरह तय किया गया है कि बढ़ती लागत के बावजूद ग्राहकों को मिलने वाला समग्र मूल्य और उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित न हो। कंपनी का उद्देश्य गुणवत्ता और तकनीकी सुविधाओं को बनाए रखते हुए लागत दबाव का संतुलन बनाना है।
इस घोषणा के बाद बीएसई में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के शेयर बढ़त के साथ ₹.385.60 पर कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन उद्योग में बढ़ती लागत के कारण कंपनियां अपने लाभ मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए चरणबद्ध तरीके से कीमतों में संशोधन कर रही हैं। हाल के महीनों में देश की कई प्रमुख वाहन कंपनियों ने भी इसी तरह के कदम उठाए हैं। पिछले महीने हुंडई मोटर इंडिया ने बढ़ती उत्पादन लागत, ऊंची जिंस कीमतों और बढ़े हुए परिचालन खर्चों का हवाला देते हुए अपने विभिन्न मॉडलों की कीमतों में जून से ₹.12,800 तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी।
इसी प्रकार मारुति सुज़ुकी इंडिया ने भी जून से अपने वाहन पोर्टफोलियो में ₹.30,000 तक की मूल्य वृद्धि लागू करने का फैसला किया। कंपनी ने कहा था कि कच्चे माल और अन्य उत्पादन संबंधी खर्चों में लगातार बढ़ोतरी के कारण यह कदम उठाना पड़ा। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी इस वर्ष की शुरुआत में अपनी एसयूवी और वाणिज्यिक वाहन श्रृंखला की कीमतों में संशोधन किया था। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीकों, अनुसंधान तथा उत्पाद विकास में लगातार निवेश बनाए रखने के लिए वाहन कंपनियां कीमतों में सीमित लेकिन नियमित बढ़ोतरी का सहारा ले रही हैं।

