भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए हाल ही में उठाए गए कदमों से भारत को वित्त वर्ष 2026-27 में 40-50 अरब डॉलर तक की विदेशी मुद्रा प्राप्त हो सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इन उपायों से देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी, बैंकिंग प्रणाली में तरलता बेहतर होगी और रुपये को भी समर्थन मिलेगा।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड की रिपोर्ट में कहा गया है कि RBI की रियायती स्वैप व्यवस्था के तहत बाह्य वाणिज्यिक उधारी मार्ग से बैंकों की उधारी लागत में लगभग 200-250 आधार अंक की कमी आ सकती है। इससे बैंकों के लिए धन जुटाना सस्ता होगा और ऋण वितरण गतिविधियों को गति मिलेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, कम वित्तपोषण लागत का सीधा लाभ बैंकिंग क्षेत्र को मिलेगा। इससे ऋण वृद्धि को समर्थन मिलेगा, कर्ज वितरण क्षमता मजबूत होगी और बैंकों की वित्तीय दक्षता में सुधार आएगा।
यह पहल RBI की वर्ष 2013 की एक समान योजना की याद दिलाती है। उस समय विदेशी मुद्रा अनिवासी जमा योजनाओं के माध्यम से लगभग 27अरब डॉलर का प्रवाह हुआ था, जबकि कुल अनिवासी भारतीय जमा प्रवाह करीब 34अरब डॉलर रहा था। उस कार्यक्रम ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और मुद्रा बाजार में स्थिरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्तमान में विदेशी मुद्रा अनिवासी जमा बैंकिंग प्रणाली की कुल जमा राशि का केवल 1.2प्रतिशत हिस्सा है। रिपोर्ट का मानना है कि इस क्षेत्र में अभी विस्तार की काफी संभावनाएं मौजूद हैं। इसी को देखते हुए कई बैंकों ने विभिन्न अवधि वाली विदेशी मुद्रा अनिवासी जमा योजनाओं पर ब्याज दरें बढ़ानी शुरू कर दी हैं ताकि अनिवासी भारतीय ग्राहकों को अधिक आकर्षित किया जा सके।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन बैंकों का ग्राहक आधार मजबूत है और जिनकी विदेशों में अच्छी उपस्थिति है, वे इन संभावित विदेशी मुद्रा प्रवाहों का सबसे अधिक लाभ उठा सकते हैं। ऐसे बैंक कुल आने वाली राशि में बड़ा हिस्सा हासिल कर सकते हैं। विश्लेषण के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था जमाकर्ताओं और बैंकों दोनों के लिए लाभकारी है। यही कारण है कि इसमें भागीदारी बढ़ने की संभावना अधिक दिखाई दे रही है।
विदेशी मुद्रा प्रवाह में वृद्धि, बेहतर तरलता और मजबूत आरक्षित भंडार रुपये की स्थिरता को समर्थन दे सकते हैं। साथ ही इससे निवेशकों का विश्वास भी बढ़ेगा। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि आने वाले समय में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 93-94 के स्तर तक मजबूत हो सकता है, यदि विदेशी मुद्रा प्रवाह अपेक्षा के अनुरूप बढ़ता है। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा अनिवासी जमा आधारित वित्तपोषण बैंकों को पारंपरिक थोक जमा की तुलना में लगभग 60-65 आधार अंक का अतिरिक्त लाभ देता है। इसका प्रमुख कारण नकद आरक्षित अनुपात और वैधानिक तरलता अनुपात संबंधी छूट है।
गौरतलब है कि RBI ने हाल ही में विदेशी मुद्रा अनिवासी जमा और बाह्य वाणिज्यिक उधारी के लिए विशेष सुविधाओं की घोषणा की है। इसके तहत बैंक विदेशों से अपेक्षाकृत कम लागत पर धन जुटा सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों का उद्देश्य विदेशी पूंजी को आकर्षित करना, संसाधन जुटाने की क्षमता बढ़ाना और बैंकिंग प्रणाली में समग्र तरलता को मजबूत बनाना है। ऐसे समय में जब वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और पूंजी प्रवाह की दिशा पर लगातार नजर रखी जा रही है, RBI का यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

