मुंबई | Tata Asset Management ने आज अपने मुख्य ‘टाइटेनियम स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड’ (SIF) के तहत ‘टाइटेनियम इक्विटी लॉन्ग-शॉर्ट फंड’ लॉन्च करने की घोषणा की है। यह फंड ‘इक्विटी लॉन्ग-शॉर्ट’ कैटेगरी का हिस्सा है, इसका उद्देश्य इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव्स में निवेश को सक्रिय रूप से प्रबंधित करके मध्यम से लंबी अवधि में मुनाफा कमाना है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बाज़ार की स्थितियों के अनुसार अपने शुद्ध इक्विटी निवेश को -25% से 100% के बीच कभी भी घटा या बढ़ा सकता है।
नया फंड ऑफर 27 अप्रैल, 2026 को खुल चूका है और 11 मई, 2026 को बंद होगा। यह फंड विशेष रूप से उन निवेशकों के लिए बनाया गया है जो बहुत अधिक जोखिम लेने की क्षमता रखते हैं। इसके लिए एक एसेट मैनेजमेंट कंपनी में PAN (PAN) स्तर पर सभी स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स को मिलाकर न्यूनतम 10 लाख रुपये का कुल निवेश होना अनिवार्य है।
टाइटेनियम इक्विटी लॉन्ग-शॉर्ट फंड मुख्य रूप से शेयरों (इक्विटी) पर आधारित है। यह अपने कुल निवेश का कम से कम 80% हिस्सा शेयर बाज़ार में लिस्टेड कंपनियों में लगाता है। यह फंड रिस्क कम करने के लिए ‘डेरिवेटिव्स’ का इस्तेमाल कर सकता है और जरूरत पड़ने पर बाजार की गिरावट का फायदा उठाने के लिए पोर्टफोलियो के 25% हिस्से तक ‘शॉर्ट पोज़िशन’ भी ले सकता है। SIF नियमों के मुताबिक, इसका कुल निवेश फंड की कुल वैल्यू के 100% से ज़्यादा नहीं हो सकता।
फंड लॉन्च के मौके पर Tata Asset Management के Chief Business Officer, Anand Varadarajan ने कहा, “SIF फ्रेमवर्क ने पारंपरिक म्यूचुअल फंड और बड़े निवेश विकल्पों (AIF/PMS) के बीच एक नया और रणनीतिक रास्ता खोल दिया है। इसकी मदद से हम टैक्स की बचत करते हुए निवेशकों के लिए आधुनिक तकनीक वाली रणनीतियां ला पा रहे हैं। ‘टाइटेनियम इक्विटी लॉन्ग शॉर्ट फंड’ के जरिए हम अपने SIF प्लेटफॉर्म का और विस्तार कर रहे हैं। यह एक ऐसा लचीला समाधान है जिसका लक्ष्य बाज़ार की स्थिति चाहे कैसी भी हो, निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिलाना है। इस फंड में इतनी खूबी है कि यह बाज़ार के हिसाब से आक्रामक रूप से निवेश कर सकता है, मंदी का फायदा उठा सकता है या जोखिम कम करने के लिए ‘आर्बिट्रेज’ का रूप ले सकता है। यह निवेशकों को बाज़ार के हर उतार-चढ़ाव में निवेश का पूरा लचीलापन देता है।”
यह फंड बाज़ार की तेज़ी और मंदी (लॉन्ग और शॉर्ट निवेश) (निवेश रणनीति की कुल संपत्ति के 25% तक शॉर्ट पोज़िशन) को इस तरह मैनेज करता है कि यह सिर्फ बाज़ार की दिशा पर निर्भर न रहे। इसका मकसद शेयर बाज़ार के उतार-चढ़ाव को मुनाफे के अवसर में बदलना है—फिर चाहे बाज़ार ऊपर जा रहा हो, नीचे गिर रहा हो या एक ही दायरे में हो। जब बाज़ार में मजबूती होती है, तो यह फंड ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए शेयरों में अपना निवेश बढ़ा देता है। लेकिन जब बाज़ार बहुत महंगा हो जाए या जोखिम बढ़ जाए—जैसे कि हाल के अंतरराष्ट्रीय तनाव के समय हुआ—तब यह फंड अपना निवेश घटाकर आपके पैसे को सुरक्षित रखने की कोशिश करता है। इस फंड के प्रदर्शन को ‘Nifty 500’ इंडेक्स के पैमाने पर मापा जाएगा।
टाइटेनियम SIF के Fund Manager, Suraj Nanda ने कहा: “पारंपरिक इक्विटी फंड बाज़ार के हर मूल्यांकन पर शेयरों में अपना निवेश अधिक रखते हैं। इसके विपरीत, ‘टाइटेनियम इक्विटी लॉन्ग शॉर्ट फंड’ को बाज़ार के मूल्यांकन के हिसाब से निवेश को घटाने या बढ़ाने के लिए बनाया गया है। यह फंड मुख्य रूप से शेयरों पर केंद्रित रहेगा, लेकिन साथ ही हमें ‘लॉन्ग’ और ‘शॉर्ट’ पोज़िशन के जरिए बाज़ार के उतार-चढ़ाव पर सकारात्मक या नकारात्मक दोनों तरह के विचार व्यक्त करने की आज़ादी देगा। यह रणनीति जोखिम बढ़ने पर निवेश को सुरक्षित करने का विकल्प देती है, और अनुकूल परिस्थितियां होने पर इक्विटी निवेश को 100% तक बढ़ाने की सुविधा भी देती है। पोर्टफोलियो के 25% हिस्से तक ‘शॉर्ट पोज़िशन’ लेने की अनुमति होने के कारण, यह फंड चढ़ते और गिरते दोनों तरह के शेयरों से मुनाफे के अवसर तलाशता है। हमारा ध्यान बुनियादी रिसर्च, अनुशासित जोखिम प्रबंधन और डेरिवेटिव्स के बेहतर इस्तेमाल पर है, ताकि न केवल बाज़ार की तेज़ी, बल्कि ठहराव और गिरावट के दौर में भी बेहतर परिणाम दिए जा सकें।”
टाइटेनियम SIF प्लेटफॉर्म उन निवेशकों के लिए तैयार किया गया है जो लीक से हटकर रणनीतियों की तलाश में हैं और यह समझते हैं कि पारंपरिक म्यूचुअल फंड की तुलना में ‘स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड’ में पूंजी के नुकसान का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक होता है। SIF को SEBI द्वारा विनियमित किया जाता है और इन पर म्यूचुअल फंड के समान ही टैक्स लागू होता है। किसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी में PAN (PAN) स्तर पर सभी SIFs को मिलाकर न्यूनतम 10 लाख रुपये का निवेश अनिवार्य है। यह मुख्य रूप से उन समृद्ध और High-Net-Worth निवेशकों के लिए है।

