बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली (आईएएनएस)। भारत में सबमरीन केबल नेटवर्क के लिए एक ग्लोबल ट्रांजिट हब बनने की प्रबल संभावना है। इसकी वजह, देश का रणनीतिक रूप से अहम स्थान पर होना और बढ़ता हुआ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर है। यह बयान ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (बीआईएफ) की अध्यक्ष, अरुणा सुंदरराजन ने मंगलवार को दिया। उन्होंने कहा कि बढ़ती हुई डेटा खपत को पूरा करने के लिए सबमरीन केबल इंफ्रास्ट्रक्चर को चार से पांच गुना बढ़ाने की जरूरत है। सुंदरराजन ने कहा, “भारत में सबमरीन केबल नेटवर्क के एक ग्लोबल ट्रांजिट हब के रूप में उभरने की प्रबल संभावना है। इसके लिए हमें अपने सबमरीन केबल इंफ्रास्ट्रक्चर को चार से पांच गुना बढ़ाना होगा।” राष्ट्रीय राजधानी में ‘इंटरनेशनल SUB-SEA केबल सिस्टम कॉन्फ्रेंस’में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे समय पर सबमरीन केबल नेटवर्क को प्राथमिकता देना आवश्यक है, जहां भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं।
भारत के डिजिटल इंफ्रास्टक्चर को मिलेगी मजबूती
भारत में सबसी केबल्स का महत्व समझाते हुए, टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने बताया कि दुनिया का 95% डेटा ट्रैफिक इन्हीं केबल्स के जरिए संचालित होता है। “हाल ही में हुई वैश्विक केबल व्यवधानों (डिसरप्शन) ने इस नेटवर्क को मजबूत करने की जरूरत को उजागर किया है। हमें अपने रणनीतिक और व्यावसायिक हितों की रक्षा के लिए सबसी केबल नेटवर्क को अधिक मजबूत और व्यापक बनाना होगा’। इस दिशा में BSNL के सीएमडी रॉबर्ट रवि ने भी कंपनी की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि क्चस्हृरु देशभर में सुरक्षित, सस्ती और विश्वसनीय कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए काम कर रहा है। “समुद्र की गहराइयों से लेकर हिमालय की ऊंचाइयों तक, BSNL पूरे भारत को जोडऩे के लिए समर्पित है”।
भारत की वैश्विक SUB-SEA नेटवर्क में बढ़ती भूमिक ा: भारत पहले से ही वैश्विक स्क्च-स्श्व्र केबल नेटवर्क का एक अहम हिस्सा है। देश में 17 अंतरराष्ट्रीय सबसी केबल्स हैं, जो मुंबई, चेन्नई, कोचीन, तूतीकोरिन और त्रिवेंद्रम में स्थित 14 केबल लैंडिंग स्टेशनों (CLS) से जुड़े हुए हैं। देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां : टाटा कम्युनिकेशंस, भारती एयरटेल, ग्लोबल क्लाउड eXchange और BSNL इस महत्वपूर्ण नेटवर्क को संचालित कर रही हैं। हाल ही में, भारती एयरटेल ने चेन्नई में SEA-ME-WE 6 सबमरीन केबल स्थापित किया, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी और मजबूत हुई। इसके अलावा, ग्लोबल टेक कंपनी मेटा (Meta) ने ‘’Project Waterworth’ की घोषणा की है, जिसके तहत 50,000 किमी लंबा अंडरसी केबल नेटवर्क बनाया जाएगा, जो भारत को अमेरिका, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका से जोड़ेगा। निष्कर्ष: बदलते वैश्विक परिदृश्य और डिजिटल विस्तार के बीच, भारत एक प्रमुख सबमरीन केबल हब बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

