बिजऩेस रेमेडीज/मुंबई
वल्र्ड साइट डे (विश्व दृष्टि दिवस पर), Standard Chartered ने अपने ‘सीइंग इज बिलीविंग’ (‘देखना ही विश्वास है’) कार्यक्रम के तहत पूरे भारत में 17 नए विजन सेंटर (दृष्टि केंद्र ) खोलने की योजना के बारे में घोषणा की है। सीइंग इज बिलीविंग एक ऐसी पहल है, जिसके तहत टाले जा सकने वाली अंधेपन की बीमारी को खत्म करने के लिए काम किया जाता। नए केंद्र उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र राज्य में भागीदार एजेंसियों की मदद से अलग अलग जिलों में स्थापित किए जाएंगे, जिससे देश में विजन सेंटर की कुल संख्या 617 हो जाएगी। इसके अलावा, बैंक ने महिलाओं को ऑप्टोमेट्रिस्ट (विजन टेक्नीशियन) बनने के लिए ट्रेनिंग के लिए एक एकेडमी खोलने की भी घोषणा की है। समस्तीपुर (बिहार) में इस नई ट्रेनिंग एकेडमी (प्रशिक्षण अकादमी) का लक्ष्य पहले बैच में 95 युवा महिलाओं को विजन टेक्निशियन बनने के लिए प्रशिक्षित करना है। यह पहल आम लोगों के जीवन को बदलने और इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण आई हेल्थ सर्विसेज (नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं) तक पहुंच बढ़ाने में सहायता करेगा। बिहार में खोले जाने वाली नई एकेडमी दिल्ली, हैदराबाद (तेलंगाना) और मदुरै (तमिलनाडु) के बाद कुल मिलाकर चौथी एकेडमी है। अब तक 120,000 से अधिक युवाओं को प्राइमरी आई केयर को बढ़ावा देने और एक ऐसा इको-सिस्टम बनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है, जो रोजगार के अवसर पैदा करता है, साथ ही इनोवेशन को बढ़ावा देता है और क्षमता निर्माण व प्रशिक्षण को सक्षम बनाता है। इन 12000 युवाओं में ज्यादातर महिलाएं हैं।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड का ‘सीइंग इज बिलीविंग’ कार्यक्रम वल्र्ड साइट डे पर अपनी वर्षगांठ मना रहा है। 2003 में भारत में लॉन्च किया गया यह कार्यक्रम 15 मिलियन से अधिक भारतीयों तक पहुंच चुका है, वहीं रणनीतिक सहयोग और पहल के माध्यम से इसे अगले 3 साल में 18 मिलियन तक ले जाने का लक्ष्य है।
सीइंग इज बिलीविंग कार्यक्रम की कुछ जरूरी बातें साझा की गई हैं :
63 आधुनिक विजन सेंटर – जो मरीजों को यात्रा का समय और पैसा बचाने में मदद करते हुए टेलीऑप्थामेलॉजी (डिजिटल मेडिकल इक्विपमेंट और दूरसंचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से आंखों की देखभाल प्रदान करना) प्रदान करते हैं।
4 आई केयर एकेडमी
2 मोबाइल विजन सेंटर
विजन सेंटर / शिविरों में 92 लाख मरीजों की जांच की गई
37 लाख मोतियाबिंद और अन्य सर्जरी
50 प्रतिशत विजन सेंटर महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।
90,000 टेली-परामर्श आयोजित किए गए।
1,25,000 अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए।
63 रेलवे स्टेशन ब्रेल लिपि (नेत्रहीन व्यक्तियों के लिए उभरे अक्षरों की एक लिपि जिसे छूकर पढ़ा जा सकता है) पर केंद्रित बुनियादी ढांचे को स्थापित करके दृष्टिबाधित लोगों की सहायता करते हैं
करुणा भाटिया – हेड ऑफ सस्टेनेबिलिटी, इंडिया, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक, इंडिया ने इस प्रयासों के बारे में कहा कि बैंक ने ‘सीइंग इज बिलीविंग’ कार्यक्रम के माध्यम से देश में विशेष रूप से दूरदराज के स्थानों में ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है, जिनमें संभावित अंधेपन को रोका जा सकता है। जहां 80 फीसदी विजन सेंटर आत्मनिर्भर हैं।
बैंक अपने लेटेस्ट और आधुनिक विजन सेंटर और ट्रेनिंग एकेडमी के माध्यम से हाई हेल्थ सेक्टर यानी नेत्र स्वास्थ्य क्षेत्र में रणनीतिक रूप से क्षमता का निर्माण कर रहा है, जबकि महिलाओं को विजन टेक्नीशियन बनने के लिए सशक्त बना रहा है। इस कार्यक्रम की दूसरी प्रमुख रणनीति है कि क्षेत्र दर क्षेत्र अंधेपन को खत्म करना। यह कार्यक्रम हमारे कार्यक्रम भागीदारों के माध्यम से जागरूकता पैदा करने और विश्व स्तरीय प्राथमिक नेत्र देखभाल उपचार तक पहुंच प्रदान करने का काम कर रहा है। इसी आधार पर यह कार्यक्रम एक बेहतर वातावरण बनाकर लोगों के जीवन को भी बेहतर बनाने के लिए बैंक के समर्पण का उदाहरण भी पेश करता है।

